-19 करोड़ की राशि स्वीकृत, फिर भी बदहाल सड़क से गुजरने को मजबूर वाहन चालक
-विधायक की पैदल यात्रा और पूर्व मंत्री के शुभारंभ का भी नहीं दिखा असर
अनोखा तीर, मसनगांव। नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर हरदा से छिपाबड़ और आशापुर तक सड़क के गड्ढे भरने का काम महज दो दिन चलने के बाद बंद हो गया है। इससे सड़क की बदहाली दूर होने की उम्मीद लगाए बैठे वाहन चालकों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत होने और जनप्रतिनिधियों द्वारा सड़क की दुर्दशा का मुद्दा उठाए जाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। वाहन चालक आज भी गड्ढों से छलनी हो चुकी सड़क पर जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। सड़क के गड्ढों को भरने के लिए शासन द्वारा 19 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बावजूद काम में तेजी नहीं आ पा रही है। कुछ दिन पहले गड्ढे भरने का काम शुरू हुआ था, लेकिन दो दिन बाद ही काम बंद हो गया। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जब सड़क सुधार के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत की गई है, तो फिर काम लगातार क्यों नहीं कराया जा रहा है। सड़क की हालत सुधारने के लिए जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक ऐसी कोई प्रभावी पहल नजर नहीं आ रही, जिससे वाहन चालकों को राहत मिल सके।
विधायक की पैदल यात्रा भी बेअसर
स्टेट हाईवे की बदहाली को लेकर क्षेत्रीय विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने पैदल यात्रा निकालकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करा चुके हैं। वहीं, पूर्व मंत्री कमल पटेल ने भी सड़क के गड्ढे भरने के काम का नारियल फोड़कर शुभारंभ किया था। उस समय लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब सड़क की हालत सुधरेगी और लंबे समय से चली आ रही परेशानी से छुटकारा मिलेगा। लेकिन काम शुरू होने के दो दिन बाद ही बंद हो जाने से इन प्रयासों का असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।
करोड़ों की स्वीकृति, राहत के नाम पर इंतजार
हरदा से छिपाबड़ और आशापुर तक स्टेट हाईवे पर जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गड्ढों से बचने के प्रयास में दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद सड़क सुधार का काम निरंतर नहीं चलने से लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि 19 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि से सड़क सुधार का काम कब गति पकड़ेगा और वाहन चालकों को गड्ढों से कब राहत मिलेगी। जनप्रतिनिधियों के प्रयासों और काम के शुभारंभ के बाद भी यदि सड़क की स्थिति नहीं सुधरती, तो निर्माण कार्य की प्रगति और उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीण रमेश पाटिल मनीष भायरे का कहना है की जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग काम बंद होने का कारण स्पष्ट करे और सड़क सुधार का काम समयबद्ध तरीके से पूरा कराए, ताकि लोगों को केवल घोषणाओं और शुभारंभ तक सीमित राहत के बजाय वास्तविक सुविधा मिल सके।





