Skip to content
Saturday, 17 October 2026
हरदा

माहवारी स्वच्छता जागरूकता संवाद कार्यक्रम

3 min read
Text Size:

अनोखा तीर, हरदा। जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय रहटगांव में बुधवार को माहवारी स्वच्छता जागरुकता पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. शैलजा महाजन, विद्यालय प्राचार्य अविनाश रानी, डॉ. अंकिता अग्रवाल ने विद्यालय की बालिकाओं के साथ चर्चा की। चर्चा के दौरान बताया गया कि माहवारी प्रकृति का वरदान है, यही महिला को मातृत्व सुख देता है। मासिक धर्म की शुरूआत लड़कियों के लिए मानसिक, शारीरिक तनाव के साथ-साथ सामाजिक दबाब भी लाती है। अपने पूरे जीवनकाल में एक महिला को लगभग 2100 दिन माहवारी के गुजारने होते हैं, जो करीब छ: साल के बराबर होते हैं। इतने दिनों को जानकारी के अभाव में किशोरियां गुजारती हैं, जिससे न केवल उनके शिक्षा, स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है बल्कि उनका आत्म विश्वास भी गिरता जाता है। लड़कियों व महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए सुरक्षित माहवारी अति आवश्यक है, माहवारी से जुड़ी गलत धारणाओं व मिथकों को दूर करने के लिए किशोरी लड़कियों के साथ माहवारी स्वच्छता के बारे में बातचीत करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह माहवारी के दौरान प्रचलित साफ सफाई न रखने जैसी कुछ आदतों के कारण होने वाले संक्रमण की संभावना को कम करता है। संवाद के दौरान बताया गया कि माहवारी स्वच्छता से संबंधित जानकारी होने से लड़कियों की उनके स्कूल में उपस्थिति में बढ़ोतरी होती है। लड़कियों के किशोरावस्था के दौरान माहवारी ऐसा विषय रहा है, जिस पर बात करने में, गांव ही नहीं, शहरी क्षेत्रों की किशोरियों और महिलाओं में भी एक तरह की कुंठा पायी जाती है, जबकि यह सीधे-सीधे शारीरिक परिवर्तन की प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे लेकर समाज में अनेक तरह की भ्रांतियां एवं गलतफहमियां हैं। आरकेएसके उमंग काउंसलर सुश्री पारूल काशिव एवं दीपक गौर ने पीपीटी एवं विडियो के माध्यम से माहवारी स्वच्छता के बारे में विस्तार से बताया। डीपीएचएनओ शक्ति मेढ़े एवं विद्यालय की नर्सिंग आफिसर सुश्री अंजली मसीह ने छात्राओं को सुरक्षित एवं स्वच्छ मासिक धर्म प्रबंधन की जानकारी दी। बालिकाओं के साथ चर्चा के दौरान रूढ़िवादी परंपराओं के बारे में जाना और समाज में व्याप्त मिथकों को तोड़ते हुए उनका तार्किक हल बताया। बालिकाओं को उनकी चिंताओं और स्थिति के बारे में सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विद्यालय एवं घर में रहने के दौरान सेनेटरी पेड्स, साफ पानी और सुरक्षित शौचालय के बारे में भी बताया गया। किशोरावस्था में कदम रखते समय 9 साल से 14 साल की उम्र में हर लड़की में माहवारी की शुरूआत होती है। माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में बात न होने के कारण किशोरियों के लिए यह एक जटिल, रहस्यमय और अबूझ पहेली बन जाती है। वे इसे शारीरिक बदलाव की सामान्य प्रक्रिया मानने की जगह एक सामाजिक संकोच का विषय मानती हैं। जिसका उनके मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस दौरान संतुलित पोषक आहार लेने के बारे में भी जानकारी दी गई।

0 Views
What do you think?

Leave a Reply