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Friday, 16 October 2026
हरदा

हर्षोल्लास से मनाया भगवान श्री 1008 आदिनाथ स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव

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-जैन समाज ने किए धार्मिक आयोजन
अनोखा तीर, हरदा। जैन धर्म प्रवर्तक, प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान श्री 1008 आदिनाथ स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर दिगम्बर जैन समाज द्वारा विश्व कल्याण की भावना के साथ विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर 108 कलशों से भगवान श्री 1008 आदिनाथ स्वामी का अभिषेक किया गया तथा चौंसठ ऋद्धि-सिद्धि दीपकों के साथ भक्ताम्बर महा मंडल विधान की पूजा-अर्चना की गई। साथ ही अखंड भक्ताम्बर पाठ का आयोजन भी किया गया। जैन समाज हरदा के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि जैन धर्म अनादि-अनंत है। जैन धर्म के वर्तमान शासन नायक भगवान श्री 1008 महावीर स्वामी के पूर्व भी तेईस तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री 1008 आदिनाथ स्वामी हैं। उन्होंने बताया कि जैन धर्म के प्रवर्तक, सृष्टि को असि, मसि, कृषि, विद्या, शिल्प और वाणिज्य का ज्ञान प्रदान करने वाले तथा जैन सिद्धांत को समूचे प्राणी जगत में प्रतिपादित करने वाले वर्तमान चौबीसी तीर्थंकर परंपरा के प्रथम तीर्थंकर आदि ब्रह्मा देवाधिदेव श्री 1008 श्री ऋषभदेव आदिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक महोत्सव पर जैन समाज द्वारा अनेक धार्मिक आयोजन स्थानीय श्री दिगम्बर जैन मंदिर खेड़ीपुरा में आयोजित किए गए। समाज के सचिव राहुल जैन ने बताया कि आदिनाथ भगवान के जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में 24 घंटे का अखंड भक्ताम्बर पाठ आयोजित किया गया था। प्रात:काल में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा कर भक्ताम्बर मंडल विधान की पूजा की गई। अखंड भक्ताम्बर मंडल विधान के पुण्यार्जक सरोज बड़जात्या परिवार रहे। प्रथम कलश का सौभाग्य पवित्र, प्रतीक बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ। प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य अंकित पवन सिंघई परिवार को मिला। रजत कलश का सौभाग्य संजय कठनेरा, अभिषेक बड़जात्या, महेन्द्र पाटनी और आलोक बड़जात्या को प्राप्त हुआ। सुबह प्रतीक, पवित्र अनिल बड़जात्या द्वारा प्रभावना का वितरण किया गया। शांतिधारा, अभिषेक तथा भक्ताम्बर मंडल विधान जैन समाज के पुजारी मनोज जैन द्वारा संपन्न कराया गया। संध्याकालीन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए महिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती रेखा अजमेरा ने बताया कि मंदिर में संध्याकाल महाआरती का आयोजन किया गया तथा महिला परिषद के सौजन्य से पालना झुलाने का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। सभी कार्यक्रमों में जैन धर्मावलंबी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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