राष्ट्रीयता की अलख जगाना है, 2047 तक भारत को परम वैभव के शिखर पर पहुंचना है

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विकास पवार बड़वाह – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के क्षेत्र प्रचारक दीपक जी विस्पुते शनिवार को बड़वाह शहर के प्रवास पर रहे। पदाधिकारी और स्वयंसेवकों से गहन चर्चा कर संघ के कार्यों का आकलन किया। साथ ही शाम को 7 बजे स्थानीय नगर पालिका परिसर में आयोजित नगर एकत्रीकरण कार्यक्रम को संबोधित किया। कहा कि हिंदुत्व का ज्वार खड़ा हो गया है। राम का वातावरण पूरे देश में बन गया है। जन्म स्थान पर रामलाल की मूर्ति भी स्थापित होने वाली है। अब राम को अपने मन मंदिर में जागृत करना है। संकल्पित कर आव्हान किया कि गली.गली-बस्ती.बस्ती में राष्ट्रीयता की अलख जगाना है। 2047 तक भारत को परम वैभव के शिखर पर पहुंचना है। दिग्विजय, सशक्त और समृद्ध बनाना है। आगे कहा कि यह सब जन-जन की जागरूकता से ही संभव है। क्योंकि समाज ही देश के भाग्य को उदित करता है। इसलिए ताकतवर नवभारत निर्माण में हम सबकी भूमिका सुनिश्चित होना चाहिए। और संघ भी इस दिशा में प्रयत्नशील है। राष्ट्र भक्ति के भाव का अनवरत जागरण कर रहा है। प्रचारक विस्पुते ने संघ के बारे में बताते हुए कहा कि संघ की गंगा 1925 से प्रवाहित होना शुरू हुई। जो कई आपदा-विपदाओं के बावजूद भी निरंतर प्रगतिशील है। 100 वर्षों की पूर्णता को छू रहा है। दुनिया का ऐसा कोई संगठन नहीं है,जो इतने दशकों तक अनुशासित व संगठित रहा हो। जबकि संघ को खत्म करने के लिए षड्यंत्र रचे गए। गांधीजी की हत्या का झूठा आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिया गया। स्वयं सेवकों पर दमन किए गए। उनको प्रताड़ना दी गई। परंतु स्वयं सेवक हिम्मत के साथ डटे रहे। आयु का क्षण-क्षण और अपने रक्त कण-कण संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगवारजी की प्रेरणा से मातृभूमि की सेवा में समर्पित कर दिया।

 

भारत की बुद्धि क्षमता को कमजोर किया…

 

प्रचारक विस्पुते ने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति में एक विद्यमान शिक्षक हुआ करता था। जो एक साथ गांव के सभी बच्चों को शिक्षा देता था। संस्कारवान बनाता था। लेकिन अंग्रेजों ने अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के जरिए भारत की बुद्धि क्षमता को कमजोर कर दिया। ज्ञान की संस्कृत विलुप्त हो गई। समाज परंपराएं भी भूलने लगी। कहा कि अंग्रेजों का अंग्रेजी शिक्षा पद्धति लागू करने का मकसद भारत में काले अंग्रेज खड़े करने का था।

 

महापुरुषों के जीवन का अनुसरण करें…

 

उन्होंने स्वामी विवेकानंद, जगदीश चंद्र बसु, ज्योतिबा फुले, सावित्री देवी फुले जैसे महापुरुषों के योगदान का उल्लेख किया और युवाओं से उनके जीवन का अनुसरण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो असंभव लगने वाले सपने पूरे करता है, वही युवा है। अगले 25 साल तक भारत के युवाओं को देश के निर्माण में योगदान देने का ध्येय लेकर चलना चाहिए।

 

पूरे विश्व में है भारत की साख…

 

कहा कि भारत की पूरे विश्व में साख बनी है। कमजोर नहीं ताकतवर बनकर उभरा है। आने वाला भविष्य भारत का ही है। क्योंकि आज भी भारत की 50% जनसंख्या युवावस्था में है। चीन और अमेरिका की औसत आयु घट चुकी है। जापान जैसा देश बूढ़ा हो चुका है। वहां नौजवान नहीं है।

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