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Saturday, 24 October 2026
हरदा

विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर संपन्न

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अनोखा तीर, हरदा। म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशन एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदा श्री अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में शुक्रवार को ÓÓमहिला सशक्तिकरण अभियान के तहत शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज हरदा में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित न्यायाधीश व सचिव श्री चन्द्रशेखर राठौर ने अभियान तहत शिविर में उपस्थित महिलाओं एवं छात्राओं बताया कि महिला सशक्तिकरण अभियान का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें और पुरुषों के बराबर अधिकार पा सकें। सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, सुरक्षा, और कौशल विकास (जैसे ड्रोन दीदी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के माध्यम से लड़कियों को शिक्षित करना और कन्या भू्रण हत्या को रोकना, मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना और ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से 15 हजार ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा इत्यादि विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही नालसा/सालसा की चल रही विभिन्न विधिक सहायता योजनाओं यौन उत्पीड़न/अन्य अपराधों की महिला पीड़ितों/उत्तरजीवियों के लिए मुआवजा योजना 2018, मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण के पीड़ितों के लिए कानूनी सेवाएं योजना, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एसिड हमलों के पीड़ितों के लिए विधिक सेवा योजना, 2016 तथा विभिन्न अधिनियमों लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013 के बारे में जानकारी प्रदान की, जिससे की महिलाएं अपने अधिकारों एवं कानूनों के प्रति जागरूक बन सके। जिला विधिक सहायता अधिकारी सौरभ दुबे ने शिविर में उपस्थित महिलाओं एवं छात्राओं को अभियान महत्व के बारे में बताया। साथ ही उन्होने महिलाओं के लिए भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बताया जो नागरिकों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को परिभाषित करते हैं। मौलिक अधिकार, जैसे समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार आदि व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक हैं। वहीं, मौलिक कर्तव्य जैसे संविधान का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, देश की रक्षा करना, नागरिकों के सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्व हैं। उनके द्वारा महिलाओं को जागरूक किया गया कि वे किस प्रकार विधिक सहायता प्राप्त कर सकती है।

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