अनोखा तीर, हरदा। कृषि विज्ञान केंद्र हरदा के वैज्ञानिक डॉ. आर सी जाटव ने किसानों को सलाह दी है कि फसल कटाई के बाद बचा हुआ फसल अवशेष को किसान भाई न जलाएं क्योंकि फसल अवशेष को जलाने से मृदा का स्वास्थ्य खराब होता है। साथ ही साथ फसलों को मिलने वाले आवश्यक पोषक तत्व की हानि होती है। आग लगाने के कारण मृदा में उपस्थित आवश्यक लाभदायक जीव जैसे बैक्टीरिया, फंजई आदि की हानि होती है जो हमारी मृदा के स्वास्थ्य एवं फसल उत्पादन में अति आवश्यक भूमिका निभाते हैं। फसल अवशेष जलने से मृदा का जैविक कार्बन काम हो जाता है जो कि मृदा स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण अंग है। अगर मृदा का जैविक कार्बन कम होगा तो मृदा कठोर होती जाएगी और लाभदायक जीव की मृदा में संख्या कम होती जाएगी। अत: किसान भाइयों से विशेष अनुरोध है कि अपने खेत का फसल अवशेष को जलाने की जगह विभिन्न कृषि यंत्रों के माध्यम से मृदा में मिलाये। श्री जाटव ने किसानों को सलाह दी है कि जब हम फसल अवशेष को मृदा में मिलाते हैं तो हमारे फसल अवशेष का कार्बन/ नाइट्रोजन अनुपात अधिक होने के कारण का मृदा का कार्बन / नाइट्रोजन अनुपात बिगड़ जाता है, जिसके कारण फसल अवशेष सड़ गल कर जल्दी खाद में परिवर्तित नहीं होते हैं और फसल अवशेष के कारण मृदा के तापक्रम में बढ़ोतरी हो जाती है, इसके लिए किसान भाई 10 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ का प्रयोग करें और 200 लीटर प्रति एकड़ जीवामृत और वेस्ट डीकम्पोजर का घोल पानी के साथ में खेत में प्रयोग करें, जिससे फसल अवशेष जल्दी डीकम्पोज्ड होकर खाद में परिवर्तित हो जाएंगे।
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