अनोखा तीर, हरदा। शहर की एक निजी होटल में रविवार को मध्यप्रदेश लेखन संघ जिला इकाई ने आंचलिक साहित्यकार समागम और संस्था का 11वां वार्षिक उत्सव आयोजित किया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व अपर सचिव आईएएस मनोज श्रीवास्तव ने संबोधित करते हुए कहा- साहित्य स्वाद का नहीं, वह आस्वादन का विषय है। मौजूदा वक्त में डिजिटल और अन्य माध्यमों से साहित्य हाशिए पर है। लिट फेस्टिवल के इस दौर में सच्चे साहित्यकारों की जिम्मेदारी बड़ी है। मप्र लेखक संघ के अध्यक्ष डॉक्टर राम बल्लभ आचार्य ने लेखक और समाज विषय पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि साहित्य के बिना चेतना संभव नहीं है। हमें चाहिए कि हम अपने भावों को सरल तरीके से प्रस्तुत करें। मप्र कार्यकारिणी सदस्य गोकुल सोनी ने कहा कि लेखक अपने भाव व्यक्त करने सही विधा का चयन करे। इस अवसर पर मप्र लेखक संघ द्वारा आंचलिक साहित्यकार को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान त्रिलोक शर्मा,जय चांडक, जीपी गौर को उनके साहित्य में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। आभार जिला इकाई अध्यक्ष जीआर गौर ने व्यक्त किया। इस अवसर पर नपा अध्यक्ष भारती कमेडिया, मप्र लेखक संघ कार्यकारिणी सदस्य गोकुल सोनी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मप्र लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ.रामबल्लभ आचार्य ने की। इस दौरान अतिथि परिचय मप्र लेखक संघ के संरक्षक डॉ.प्रभुशंकर शुक्ल ने व्यक्त किया। उन्होंने अपनी चिर परिचित शैली में कार्यक्रम के उद्देश्य सहित विषय पर प्रकाश डाला।
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