गणेश पांडे,भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करोंदिया गांव के बीच में किसी घर से लगे हुए भूसे के ढेर में निश्चिंत सोया हुआ, ये बाघ मध्यप्रदेश में वन्यप्राणी प्रबंधन में आने वाले खतरों और मानव वन्यजीव द्वंद की भयावह तस्वीर बयां करता है। इसी कड़ी में शनिवार को ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर के गुरबाही बीट से लगे राजस्व एरिया में चरवाहे पर बाघ ने हमला कर दिया। इस घटना में चरवाहे की मौके पर ही मौत हो गई। पतौर रेंजर अर्पित मैराल ने बताया कि घटना में पतौर निवासी पिनु पिता रामस्वरूप सिंह उम्र 55 वर्ष को बाघ ने अपना शिकार बना लिया। इस हादसे में बुद्ध चरवाहे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया है।
हर 5 दिन में एक मौत
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सूत्रों की मानें तो 1 जनवरी 2023 से दिसम्बर 2023 तक मानपुर बफर परिक्षेत्र में 5 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। वहीं पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 15 ग्रामीणों की मौत हुई है, इसके साथ ही लगभग 60 से ज्यादा ग्रामीणों को बाघ और वन्य प्राणियों ने घायल भी किया है। यानि हर 5 दिन में एक घटना हो रही हैं। इनमें अधिकतर घटनाएं बाघ के हमलों के कारण हुई हैं। मध्यप्रदेश के स्थापित लगभग सभी टाइगर रिज़र्व में कमोबेश यही स्थिति है। बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 165 बाघ हैं और पूरे क्षेत्र में अन्य वन्य प्राणियों की भी मूवमेंट बनी रहती है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही वन्य प्राणी है। बाघों की संख्या भी इस वर्ष 165 हो गई है। संख्या के कारण बाघ अपने क्षेत्र के साथ-साथ गांव और गांव के आसपास भी दिखाई देते हैं। वहीं ग्रामीण भी मवेशियों को चराते चराते घने जंगल में चले जाते है।
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