फोरलेन तथा स्टेट हाइवे के मध्य ग्राम चारखेड़ा समेत अन्य गांव के लोग इन दिनों पुल के अभाव में अव्यवस्थाओं से दो-चार करने को विवश हैं। यहां चारखेड़ा-सोडलपुर मार्ग पर नीमाचा खुर्द व बरकला गांव के बीच टिमरन नदी पर लगभग 1 करोड़ रूपये की लागत से पुल बनना है। जिसका टेंडर समेत अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद कार्य स्थल पर बोर्ड भी गला है। परंतु , अब तक काम ने रफ्तार नही पकड़ी है। परिणामस्वरूप ये लेटलतीफी ग्रामीणों की चिंता मेें तब्दील होने लगा है। क्योंकि, डेढ़ महिने बाद रबी फसल तथा उसके दो महिने बाद ग्रीष्मकालीन मूंग की कटाई होगी। उस वक्त ट्रेक्टर-ट्राली और हार्वेस्टर को निकालने में जद्दोजहद तय मानी जा रही है।

यह वैकल्पिक मार्ग बनाया
अनोखा तीर, हरदा। चारखेड़ा में सोडलपुर मार्ग पर नीमाचा खुर्द व बरकला गांव के बीच टिमरन नदी पर निर्माणाधीन पुल की धीमी रफ्तार के चलते स्थानीय लोगों के साथ ही आसपास के ग्रामवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा गांव में इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग से ग्राम मनियाखेड़ी तक सड़क का निर्माण कार्य भी कछुआ चाल चल रहा है। जिसके चलते मार्ग पर बिछी गिट्टी राहगिरों की जी का जंजाल बनी हुई है। ग्रामीणों की मानें तो यह मार्ग महिनों से बन रहा है। बता दें कि इसी मार्ग से करीब आधा दर्जन गांव के सैकड़ों लोगों का आवागमन निर्भर है। ऐसे में अधूरे काम के कारण ग्रामीणों को लंबा फेर लगाने की मजबूरीू ूहै। क्योंकि, निर्माणाधीन पुल के पास वैकल्पिक मार्ग बनाया है, जो कि ऊंचा होने के साथ साथ दुर्घटनाओं की तमाम आशंकाओं से भरा हुआ है। यही वजह है कि अधिकांश ग्रामीण दूसरे मार्ग का उपयोग करने को विवश हैं। फलस्वरूप अधिक दूरी तथा ईंधन की बर्बादी जारी है। गौरतलब है कि सालों पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत इस जगह पर पुल बना हुआ था, जो लंबे समय के बाद बुरी तरह जर्जर तथा आसपास से गड्ढो में तब्दील हो चुका था। जिससे आवागमन में खासकर ट्रेक्टर-ट्राली और हार्वेस्टर के आते-जाते वक्त अप्रिय घटना की आशंका रहती थी। इसी क्रम में ग्रामीणों की लगाातर के मांग के परिणामस्वरूप यहां ९९.६९ लाख रूपये की लागत से पुल का निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ है।
महज एक कदम बढ़ा काम
ग्रामीण बताते हैं कि लंबे समय तक काम शुरू नही हुआ। इस दिशा में सक्रिय होने के बाद कार्यस्थल पर बोर्ड लगा। इसके बाद भी दिन पर दिन गुजरते रहे। जिसके बाद ग्रामीणों को पुन: सक्रियता बढ़ानी पड़ी, तब कहीं पुराना पुल को डिस्मेंटल कर अब कार्यस्थल पर पानी खाली करने की कवायद नजर आ रही है।
प्रयासों से मिली सौगात, अब….
गांव के निकुंज रायखेरे ने बताया कि चारखेड़ा और मन्याखेड़ी समेत यहां से गुजरने वाले लोगों ने 3 साल तक क्षतिग्रस्त पुल का दंश झेला। जिसके बाद सतत् प्रयासों के चलते पुल की सौगात मिली है। लेकिन अब कार्य एजेंसी की लेटलतीफी देखने को मिल रही है, जो इस सुविधा के लिए ओर अधिक इंतजार कराएगी।
भुराली पर भी पुल प्रस्तावित
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि टिमरनी की तरह भुराली नदी पर भी पुल प्रस्तावित है। हालांकि, दोनों जगह हालात एक समान हैं। दोनों कार्य स्थलों पर पानी निकालने के लिए यंत्र स्थापित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक ठेकेदार का कहना है कि पानी की धार कम होते ही काम शुरू कर देंगे।
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