भोपाल। कलियासोत नदी को बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में सुनवाई चल रही है। इसमें एनजीटी ने तक कैचमेंट में काबिज अतिक्रमण को हटाने और रिक्त कराई गई भूमि को हरित पट्टी में बदलने का आदेश दिया था। इसके बावजूद अधिकारी प्राधिकरण के आदेश को तामील कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। समयसीमा समाप्त होने के बाद भी अतिक्रमण हटना तो दूर, अब तक चिंहाकन और सीमांकन का काम भी पूरा नहीं हुआ। अब सरकार को इसकी रिपोर्ट 14 जनवरी 2024 को एनजीटी के समक्ष पेश करनी है। इसके बाद फैसला होगा।
बिल्डर्स के साथ अधिकारी भी जिम्मेदार
बता दें कि कलियासोत के कैचमेंट में आने वाली कालोनियों के रहवासी जो ठगे गए हैं, इसके लिए बिल्डरों के साथ निगम और टीएंडसीपी के अलग-अलग शाखाओं के 12 से अधिक अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अब उन्हीं विभागों के अधिकारी इस अतिक्रमण को बचाने के लिए लापरवाही बरत रहे हैं। इन्हीं की वजह से कलियासोत के कैचमेंट में अतिक्रमण बढ़ता गया। जब बिल्डरों ने लोगों को महंगे दामों में फ्लैट, मकान और भूखंड बेचे, उस समय उनके पास सारे दस्तावेज वैध थे। जबकि यह जमीन पहले ही कैचमेंट के दायरे में थी। यहां निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती, लेकिन बिल्डरों को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के दौरान अधिकारियों ने बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की। जबकि ये चाहते तो पहले से ग्रीन बेल्ट में कालोनियों का निर्माण नहीं होता और खरीदार भी ठगे जाने से बच जाते।
कार्रवाई रोकने अधिकारियों पर बना रहे दबाव
कलियासोत नदी को बचाने के लिए आगे आए याचिकाकर्ता सुभाष सी पांडेय ने बताया कि कैचमेंट के अतिक्रमण को बचाने के लिए अधिकारियों पर भी दबाव बनाया जा रहा है। बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए पहले ही अधिकारियों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करवा दिया। अब अपनी गलतियों को छिपाने के लिए कार्रवाई में लापरवाही कर रहे हैं। उधर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अतिक्रमण को बचाने के लिए कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को पत्र लिख रहे हैं।
कब्जाधारियों को प्रतिवादी बनाने के निर्देश
एनजीटी ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि जो भी अतिक्रमण चिह्लित किए गए हैं उन्हें जल्द नोटिस देकर हटाया जाए। इसके साथ ही अतिक्रमणकारियों को भी प्रतिवादी बनाया जाए, जिससे उनका पक्ष भी बेंच के सामने आए। इधर नदी के किनारे अवैध निर्माण होने से नदी की बायोडायवर्सिटी पर भी असर हो रहा है। इसके आसपास के घरों का सीवेज सीधे नदी में पहुंच रहा है। बड़ी कालोनियों में गंदे पाने को ट्रीट करने के लिए प्लांट नही है। यहां तक कि बायोमेडिकल वेस्ट को भी नदी में फेंका जा रहा है। लाखों लीटर गंदा पानी छोड़ रहे हैं।
सेंट्रल वर्ज व साइड में हुए अतिक्रमण के मामले में भी लापरवाही
एनजीटी ने मुख्य सड़कों के दोनों ओर साइड और बीचों-बीच सेंट्रल वर्ज पर हुए 600 से अधिक कब्जे हटाने के लिए भी जिला प्रशासन, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग को काम सौंपा है। लेकिन इसमें भी अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। एस मामले की एनजीटी में सुनवाई थी। लेकिन न तो इसमें कलेक्टर पहुंचे और न ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारी उपस्थित हुए। ऐसे में एनजीटी ने सुनवाई अगली दिनांक तक टाल दी।
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