राम जन्मभूमि आंदोलन की साक्षी रही आदिवासी अंचल की धरा

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 आलीराजपुर। सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मर्यादा पुरुषोत्तम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। आदिवासी अंचल आलीराजपुर की भूमि भी राम जन्मभूमि आंदोलन की साक्षी रही है। आंदोलन के समय देशभर में निकाली गईं चार यात्राओं में से एक का समापन आलीराजपुर में हुआ था। उस समय यात्रा के साथ यहां कांसे से निर्मित प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान व मां भारती की मूर्तियां भी लाई गई थीं। यात्रा समापन पर इन्हें यहां सनातन सेवा आश्रम में स्थापित किया गया था। रामभक्तों के आंदोलन की साक्षी रहीं ये मूर्तियां आज की पीढ़ी को उस समय के संघर्ष की याद दिलाती हैं।

राम जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन के लिए समय वर्ष 1985-86 में अयोध्या से देशभर में अलग-अलग दिशाओं में चार यात्राएं निकाली गई थीं।मध्यभारत की यात्रा का समापन आलीराजपुर में हुआ था। जनजागरण के लिए निकाली गई यात्रा दो साल का सफर तय कर यहां पहुंची थी। यात्रा में रथ में भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमानजी व मां भारती की मूर्तियां निकली थीं।
राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े रहे संजय गुप्ता व गणपत गुप्ता बताते हैं कि उस समय विहिप के केंद्रीय पदाधिकारी हुकुमचंद सांवला यहां यात्रा संग आए थे। तब अंचल के रामभक्तों ने अपार उत्साह के साथ रामलला का स्वागत किया था। समापन के बाद प्राचीन सनातन सेवा आश्रम में विधिपूर्वक मूर्तियों को विराजित किया गया। रामलला के विराजित होने के बाद यहां आंदोलन को लेकर भक्तों में और भी उत्साह भर गया था।
समय-समय पर यहां रामभक्त विविध आयोजन करते हैं। गुप्ता बताते हैं कि आलीराजपुर की धरा रामजन्म भूमि मुक्ति आंदोलन के अन्य विविध अवसरों की साक्षी भी रही है। आलीराजपुर के कारसेवक सक्रिय रूप से उस समय आंदोलन से जुड़े रहे थे।

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