भोपाल। जिले में जहां एक तरफ साइबर तहसीलों को शुरू करने की तैयारी की जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ वर्तमान में तहसीलों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो पा रहा है। दरअसल तहसीलों में अब भी सीमांकन, नामांतरण, बंटान आदि कार्यों के लिए लोगों को चक्कर लगाना पड़ रहे हैं। इसके अलावा इन सभी की रसीद लेने के लिए भी लोकसेवा केंद्रों पर घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। इसी कार्यप्रणाली की वजह से तहसीलों में लगभग 800 से अधिक प्रकरण लंबित हैं ।बता दें कि जिले की हुजूर, कोलार और बैरसिया तहसीलों को साइबर सुविधाओं से लैस करने की तैयारी की जा रही हैं। जिनमें नामांतरण, बंटान, सीमांकन सहित अन्य सभी के आवेदन आनलाइन लिए जाएंगे और लोगों को इनकी हर तरह की जानकारी और दस्तावेज भी आनलाइन मिल जाएगी।
सीमांकन कराने लगाना पड़ता है चक्कर
जिले में बैरसिया, कोलार, हुजूर, गोविंदपुरा, एमपीनगर, टीटीनगर, शहर और संत हिरदाराम नगर एसडीएम वृत्त कार्यालय हैं और हुजूर एवं बैरसिया तहसील कार्यालय हैं। इन सभी में हर दिन सीमांकन के लगभग एक हजार आवेदन आते हैं। सीमांकन के लिए जमीन मालिक लोकसेवा केंद्र से शुल्क जमा कर रसीद तो प्राप्त कर लेते हैं लेकिन सीमांकन कराने के लिए कार्यालयों के कई चक्कर लगाना पड़ते हैं। जमीन मालिक पटवारी, राजस्व निरीक्षक के आगे-पीछे घूमते रहते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है । इसके लिए एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक गुहार लगाना पड़ती है।
नामांतरण के लिए भटकते रहते हैं भूस्वामी
एसडीएम कार्यालयों में हर दिन लगभग एक हजार से अधिक मामले नामांतरण के पहुंचते हैं, जिन पर तत्काल निर्णय नहीं हो पाता है। संपत्ति के मालिक रसीद तो प्राप्त कर लेते हैं लेकिन इसके बाद उन्हें नामांतरण कराने के लिए कार्यालयों में निचले स्तर के कर्मचारियों के आगे-पीछे घूमना पड़ता है। जब तक वह अतिरिक्त राशि जमा न कर दें, तब तक नामांतरण का काम भी नहीं होता है। जबकि सरकार ने अब रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण करने के निर्देश दिए हैं।
काम कराने के लिए इनको लगाना पड़े चक्कर
मैंने अपनी जमीन का सीमांकन कराने के लिए अक्टूबर में आवेदन किया था, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।जब बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाना पड़े और रुपये खर्च किए तब जाकर सीमांकन की कार्रवाई पूरी हो सकी।
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