नितेश गोयल, हरदा। मोहन सरकार को 5 जनवरी से पहले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी प्रशासनिक जमावट करनी पड़ेगी। क्योंकि 5 जनवरी के बाद चुनाव आयोग की अनुमति के बिना कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार के तबादले नहीं हो सकेंगे, इसलिए राज्य सरकार इससे पहले ही बड़े पैमाने पर तबादले करने की जुगत में लगी हुई है। लोकसभा चुनाव के कारण 6 जनवरी से 8 फरवरी तक मतदाता सूची का संक्षिप पुनरीक्षण कार्यक्रम है। जिसके कारण सरकार तबादले नहीं कर सकती। इसलिए मोहन सरकार ऐसे अधिकारियों के सबसे पहले तबादले करने के मूंड में है, जो विधानसभा चुनाव में भाजपा नेताओ के आरोपों के निशाने पर रहे हैं। प्रदेश सरकार उन अधिकारियों के तबादले करने करेगी, जिनके जून २०२४ में पदस्थापना के ३ वर्ष पूर्ण होना है। क्योंकि जून में लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। तब चुनाव आयोग को ही पावर रहेगा। जानकारी में यह आया है कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, विदिशा, बैतूल, राजगढ़, बालाघाट, सागर, नर्मदापुरम, शहडोल, सतना, खंडवा, सिंगरौली, कटनी, सीधी, नरसिंहपुर, देवास सहित दो दर्जन से अधिक कलेक्टर और आधा दर्जन संभागायुक्त को बदला जा सकता है। वहीं २६ जिलों के जिला पंचायत सीईओ, ८ निगम आयुक्त, २० से अधिक निगम मंडल के एमडी सहित सचिव, प्रमुख सचिव, अधिकारी बदले जा सकते हैं। कलेक्टरों के बदले जाने का सबसे बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि २०१५ बैच के अफसरों को फील्ड पर भेजा जाना है, वहीं २०१४ बैच के ३ आईएस अधिकारी भी अब तक कलेक्टर नहीं बन पाए हैं, उन्हें भी फील्ड पर भेजा जाना है। वहीं उन आईएएस अधिकारियों को भी इस बार मौका मिल सकता है, जो पिछले ३ वर्षों से मंत्रालय में पदस्थ थे और उन्हें फील्ड पर कोई पोस्टिंग नहीं मिली है। ऐसे आईएएस अफसर नेहा मारव्या, रवींद्र सिंह, गिरीश शर्मा, चंद्रशेखर बालिन्वे, अजय गुप्ता, धनंजय प्रतापसिंह, ज्ञानेश्वर पाटिल, अजीत कुमार, शिल्पा गुप्ता, सरिता प्रजापति, मीनाक्षी सिंह, अभिषेक सिंह को मोहन सरकार की कृपा से फील्ड पर भेजा जा सकता है।
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