जीवन में शांति प्राप्त करने के लिए ज्ञान की नितांत आवश्यकता : पं. राजेंद्रानंद  

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प्रशांत शर्मा, हरदा। ग्राम रेवापुर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन शनिवार को प्रसिद्ध कथा वाचक हरिद्वार निवासी राजेंद्रानंद महाराज ने कहा कि सभी के कल्याण के लिए रेवापुर गांव में बेनीवाल परिवार द्वारा भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा में आसपास सहित दूर गांवों से लोग आकर धर्मलाभ ले रहे हैं। इसके अलावा लाइव कथा सुनकर भी लोग परमात्मा की कृपा के पात्र बन रहे हैं। ईश्वर, शास्त्र और गुरु में हमेशा श्रद्धा रखना। भगवान से यही प्रार्थना करना कि हे मेरे मालिक परमात्मा के प्रति मेरी श्रद्धा कभी कम न हो। धर्म, शास्त्र, वेदों और गुरुवाणी के प्रति मेरे अंदर कभी अश्रद्धा न आए। जिस दिन हमें ज्ञान हो जाता है उस दिन हमें अंदर से शांति प्राप्त हो जाती है। ज्ञान के साथ दूसरा कोई श्रेष्ठ नहीं है। गुरु, ग्रंथ और शास्त्र ये हमारे ज्ञान के स्त्रोत हैं। इनमें कभी रुचि कम न हो। ऐ दाता मेरे अंदर क्षमा भाव बना रहे। हममें दूसरों को माफ करने और सहनशीलता का भाव हो। गुरु जम्भेश्वर ने भी अपनी वाणी से कहा कि मनुष्य को हमेशा मधुर और सबके कल्याण के भाव के साथ जीना चाहिए। सद्गुरु जब कृपा करते हैं जो हमारे अंदर शीलता का भाव आ जाता है। इससे हमारा कल्याण होना निश्चित है। कथा के दौरान राजेंद्रानंद महाराज ने भोज, माता सती सहित अन्य प्रसंगों का भजनों के साथ सुंदर वर्णन किया। बताया कि माता सती प्रभु श्रीराम व माता सीता के दर्शन के लिए जाती है। इसके बाद भगवान शिव माता सती से क्रोधित हो जाते हैं। सती के पिता प्रजापति दक्ष एक बड़ा हवन यज्ञ कराते हंै। भगवान शिव को अपमानित करने का प्रयास किया जाता है। इससे व्यथित होकर माता सती ने उसी हवन कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद प्रजापति का सिर भी धड़ से अलग कर दिया जाता है। कथा सुनने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

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