बहू को बेटी कहकर पुकारों, घर में नहीं होंगे झगड़े : राजेंद्रानंद महाराज

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अनोखा तीर, हरदा। रेवापुर गांव में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन हरिद्वार से आए प्रसिद्ध कथावाचक राजेंद्रानंद महाराज ने कहा कि भगवान को पाने के लिए ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य होना जरूरी नहीं है। भगवान के हो जाओ तो भगवान को पा लोगे। क्या भगवान विद्वान को मिलते हैं ऐसा कहां लिखा है। धु्रवजी ने कौन सी पढ़ाई की थी, लेकिन उनको भगवान मिले। अगर भगवान बुढ़ापे में मिलते तो मेरे प्रहलाजी कौन से बूढ़े हो गए थे। ऐसा कुछ नहीं है। भगवान की भक्ति किसी भी स्थिति और उम्र में की जा सकती है। भगवान तो कभी भी पा सकते हैं, बस हमें भक्ति करनी होगी। अगर हमारे बोलने से हमारे परिवार और घर में अशांति पैदा होती है तो हमें चुप रहना चाहिए। क्योंकि जियो और जीने दो यही सबसे बेहतर है। हमारी जन्मभूमि हमारे लिए स्वर्ग से बेहतर है। इसलिए हमारी जन्मभूमि हमारे लि सर्वश्रेष्ठ होनी चाहिए। हमारी कोशिश रहना चाहिए कि हमारे कारण हमारी जन्मभूमि पर अशांति नहीं होनी चाहिए। अपने घर को लड़ाई का अखाड़ा मत बनाओ। अपने घर को प्यार और शांति का घर बनाओ ताकि सभी आपस में शांति से रह सके। कथा वाचक राजेंद्रानंद महाराज ने उपस्थित महिलाओं से कहा कि जिस तरह तुम अपनी बेटी को दिन में चार बार बेटी कहकर पुकारती हो उसी तरह अपनी बहू को भी चार बार बेटी कहकर देखो अपने घर में झगड़े सब शांत हो जाएंगे। जिनके परिवार में परोपकारी जीव रहे हैं या दान पुण्य करने वाले माता-पिता या दादा-दादी रहते हैं उनके बच्चों में कभी अहंकार नहीं आ सकता। मेरे युवा साथियों और बहनों भजन करने की कोई आयु नहीं होती है। भगवान गुरु जम्भेश्वर ने भी कहा कि भगवान की भक्ति कभी भी की जा सकती है, बस मन में भक्ति सच्ची हो। कथा आयोजक रेवापुर निवासी हरिशंकर बेनीवाल ने बताया कि उनके पिता स्व. रामलाल पटेल की स्मृति में यह आयोजन कराया जा रहा है। 26 दिसंबर को पूर्णाहुति व प्रसादी वितरण के साथ कथा का समापन किया जाएगा।

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