अनोखा तीर, हरदा। मुख्यालय स्थित पशु चिकित्सालय में एक चार माह की डॉगी के इलाज में लापरवाही बरतना महंगा पड़ गया। क्योंकि, इलाज के अभाव में गुरुवार 1४ तारीख को उसकी जान चली गई। जबकि मृत डॉगी परवो वायरस से ग्रसित थी। बावजूद, पशु चिकित्सालय में महज तीन दिन उसका इलाज कर सब कुछ ठीक हो जाने की बात कही। ये मामला बीतें 5 दिसम्बर का है। गुर्जर बोर्डिंग निवासी हिमांशु गौर ने बताया कि समुचित इलाज के अभाव में डॉगी की जान चली गई है। जबकि उसकी हालत को लेकर चिकित्सक से आशंका भी जता चुका था। परंतु उन्होंने केस को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद 8 दिसम्बर से डॉगी की घर पर ही देखरेख कर रहे थे। इस बीच 13 दिसम्बर बुधवार को डॉगी की हालत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे। लेकिन शाम के वक्त चिकित्सालय बंद हो चुका है। ऐसी स्थिति में जैसे तैसे उसके मुंह में दूध, ग्लूकोज व पानी पिलाया गया, ताकि उसे कुछ राहत मिल सके। बावजूद उसकी हालत में कोई सुधर नही हुआ। अंत में वायरस से ग्रसित डॉगी ने दम तोड़ दिया। मामले में गौर ने आरोप लगाया कि यदि चिकित्सक उसे जानलेवा वायरस के बारे में विस्तार से बता देते तो संभवत: उसकी जान ना जाती। ऐसा इसलिए, क्योंकि उसके शरीर में मौजूद वायरस दूसरों के लिए दुखदायी साबित हो सकता था। इसी बात को ध्यान में रखकर परिवारजनों ने नेमावर स्थित नर्मदा तट पहुंचकर उसे जलसमाधि दी है।
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