कहा जाता है कि निजाम बदलते ही वजीर और प्यादों के रंग-ढंग भी बदल जाते हैं। यही बात इन दिनों इंदौर में भी देखने को मिल रही है। प्रदेश में भाजपा नेतृत्व ने बदलाव करते हुए डा. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बना दिया। कार्यभार संभालते ही बड़े सरकार ताबड़तोड़ फैसले कर रहे हैं। उनके देखादेखी अपने इंदौर के छोटे सरकार यानी महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी एक्शन में दिखाई दे रहे हैं। पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल में महापौर को उच्च अधिकारियों के अलावा भोपाल से भी वैसा सहयोग नहीं मिल रहा था, जैसी अपेक्षा थी। अब बड़े सरकार को उसी खेमे का बताया जा रहा है, जिसका ठप्पा महापौर पर भी लगा है। ऐसे में बड़े सरकार का साथ मिलते ही छोटे सरकार भी बदले-बदले नजर आने लगे हैं। अतिक्रमण, स्वच्छता व फुटपाथ पर कब्जों को लेकर महापौर का मैदान में उतरना यही संकेत दे रहा है।
पोल खोल रहे बिजली कंपनी की पोल
बीते कुछ वर्षों में शहर में बड़े पैमाने पर सड़कों का चौड़ीकरण हुआ है। चौड़ीकरण करने के पीछे नगर निगम की मंशा थी कि इससे शहर का यातायात सुगम होगा और हादसों पर भी नियंत्रण होगा। मगर ऐसा लगता है कि नगर निगम की इस मंशा को मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पलीता लगाने पर तुली हुई है। निगम द्वारा चौड़ी की गई कई सड़कों के बीच में अब भी बिजली के पोल सीना तानकर खड़े हुए हैं। सड़क के बीच में खड़े ये बिजली पोल न सिर्फ यातायात को बाधित करते हैं, बल्कि कई बार हादसे का सबब भी बनते हैं। छोटे-छोटे कामों को लेकर आम उपभोक्ता को परेशान करने वाली बिजली कंपनी को लोगों की यह बड़ी परेशानी नजर नहीं आ रही। हाथीपाला, मालवा मिल, जूनी इंदौर जैसे इलाकों में खड़े बिजली के पोल बिजली कंपनी की पोल खोल रहे हैं।
बदलाव की बयार ने जगा दिए नए कार्यकर्ताओं के अरमा
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में से तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की। यहां पर भाजपा आलाकमान ने पूरी तरह से नेतृत्व परिवर्तन करते हुए घर-भर के बर्तन बदल दिए। भाजपा में चल रही बदलाव की इस बयार से पार्टी के कई नए और बरसों से पद की चाह रख रहे कार्यकर्ताओं में उम्मीद की किरण जागी है। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ने पदभार संभालते ही निगम-मंडलों में नियुक्ति की शुरुआत भी कर दी है। नई सरकार के गठन के साथ ही यह सिलसिला तेज होगा। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनों को एडजस्ट करने के लिए कई सारे आयोग गठित कर दिए थे। भाजपा अभी जिस तरह से जातिगत समीकरण साध रही है, उससे पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि बदलाव की इस बयार में उनका भी नंबर किसी निगम-मंडल या आयोग में लग सकता है।
लोगों को रास नहीं आ रही ‘यादव’ की ‘यादव’ को बधाई
मध्य प्रदेश में शिव ‘राज’ के बाद अब मोहन ‘राज’ की शुरुआत हो चुकी है। नए मुख्यमंत्री मोहन यादव को बधाई देने उनके समर्थकों सहित पार्टी नेताओं में होड़ मची हुई है। इन बधाइयों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा एक खास बधाई की हो रही है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने भी अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट से नए मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए पोस्ट शेयर की है, जो कि अब चर्चा का विषय बन गई है। अपनी पोस्ट में अरुण ने अपने पिता की फोटो भी लगाई है। कांग्रेस नेता की इस पोस्ट पर लोग कई तरह के कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है कि बधाई कुछ ज्यादा नहीं हो गई? कई लोग इस बधाई को भाजपा-कांग्रेस की ओबीसी सियासत से जोड़कर, तो कुछ आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
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