इंदौर। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज होता है या परिवाद प्रस्तुत होने पर न्यायालय अपराध किए जाने का संज्ञान लेता है तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 में आरोपित को अग्रिम जमानत पाने का अधिकार होता है। अग्रिम जमानत का लाभ पाने के लिए जरूरी है कि आरोपित व्यक्ति को आशंका हो कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसा होने पर वह अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दे सकता है।
एडवोकेट आंचल राजन सक्सेना ने बताया कि यह ध्यान रखें कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो उसका अग्रिम जमानत का आवेदन मेंटेनेबल नहीं होता है। अग्रिम जमानत का प्रविधान सिर्फ अजमानतीय अपराधों में होता है। हमारे कानून में कई आपराधिक धाराएं जमानतीय हैं। ऐसे मामलों में यानी जमानतीय धाराओं में अग्रिम जमानत का आवेदन प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। जमानतीय अपराधों में अग्रिम जमानत का कोई प्रविधान ही नहीं है।

