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Tuesday, 27 October 2026
मध्य प्रदेश

जमानतीय अपराधों में नहीं मिलती अग्रिम जमानत, जानें सेक्शन 438 के बारे में

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इंदौर। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज होता है या परिवाद प्रस्तुत होने पर न्यायालय अपराध किए जाने का संज्ञान लेता है तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 में आरोपित को अग्रिम जमानत पाने का अधिकार होता है। अग्रिम जमानत का लाभ पाने के लिए जरूरी है कि आरोपित व्यक्ति को आशंका हो कि उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। ऐसा होने पर वह अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दे सकता है।

एडवोकेट आंचल राजन सक्सेना ने बताया कि यह ध्यान रखें कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो उसका अग्रिम जमानत का आवेदन मेंटेनेबल नहीं होता है। अग्रिम जमानत का प्रविधान सिर्फ अजमानतीय अपराधों में होता है। हमारे कानून में कई आपराधिक धाराएं जमानतीय हैं। ऐसे मामलों में यानी जमानतीय धाराओं में अग्रिम जमानत का आवेदन प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। जमानतीय अपराधों में अग्रिम जमानत का कोई प्रविधान ही नहीं है।

अग्रिम जमानत देते समय न्यायलय यह देखता है कि कहीं अग्रिम जमानत का आवेदन प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति आदतन अपराधी तो नहीं है। प्रथम दृष्टतया अपराध में उसकी संलिप्तता तो नहीं दिखाई पड़ रही है। क्या वह प्रतिष्ठित व्यक्ति है और इस बात की आशंका है कि अगर उसे गिरफ्तार किया गया तो उसकी प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है। किसी व्यक्ति को अग्रिम जमानत का लाभ देते समय न्यायालय यह भी देखता है कि आरोपित अग्रिम जमानत देने के बाद पुलिस को जांच में सहयोग करेगा या नहीं।
अग्रिम जमानत हो सकती है निरस्त
किसी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देते समय कोर्ट उस पर कुछ शर्तें अधिरोपित कर सकता है। इन शर्तों का उल्लंघन होने की स्थिति में कोर्ट अग्रिम जमानत निरस्त भी कर सकता है। अग्रिम जमानत केवल सत्र न्यायालय और हाई कोर्ट ही दे सकते हैं। अग्रिम जमानत प्राप्त करने के बाद व्यक्ति को अधीनस्थ न्यायालय जहां आपराधिक प्रकरण का विचारण होना है उसके समक्ष उपस्थित होकर नियमित जमानत करानी होती है।
नियमित जमानत स्थायी संपत्ति की रजिस्ट्री, फिक्स डिपाजिट की रसीद या नकद जमाकर आरोपित के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी जा सकती है। अग्रिम जमानत स्वीकारते हुए अग्रिम जमानत देने वाला न्यायालय अधीनस्थ न्यायालय को आदेश देता है कि वह आरोपित से निश्चित राशि की प्रतिभूति प्राप्त कर उसे जमानत का लाभ देवें।
अगर आरोपित शर्तों का पालन नहीं कर रहा है या जांच में सहयोग नहीं करता है या पूछताछ के लिए उसकी गिरफ्तारी जरूरी है तो शासन की ओर से अग्रिम जमानत निरस्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।
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