बिना निरीक्षक के चल रहे यातायात थाने

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 ग्वालियर- ग्वालियर महानगर में चार यातायात थाने है। लेकिन गजब की बात यह है कि इन थानों पर एक भी निरीक्षक की पोस्टिंग नहीं है। क्योंकि पुलिस मुख्यालय से एक भी निरीक्षक ग्वालियर को मिला ही नहीं है। पूरे शहर की यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए केवल एक डीएसपी है। जबकि सूबेदार और उप निरीक्षक की संख्या बल भी पूरी नहीं है। आरक्षक और प्रधान आरक्षक की संख्या बल काफी कम है।

आधे आरक्षकों से चल रहा है काम

हालात यह है कि ग्वालियर जिले के लिए 223 आरक्षक की पदस्थापना होना चाहिए पर मौजूदा समय में केवल 112 हैं मतलब 126 आरक्षकों की कमी है। जबकि ग्वालियर प्रदेश राजनीत में केन्द्र बिंदू माना जाता है उसके बाद भी यहां पर पुलिस बल पूरा नहीं होता। क्योंकि यह शहर के जनप्रतिनिधियों का उदासीन रवैया है ।शहर में बने मैरिज गार्डन के पास पर्याप्त मात्रा में वाहन पार्किंग उपलब्ध नही हैं। इसके कारण काफी सारे वाहन सड़क पर ही पार्क होते हैं जिससे यातायात बाधित होता है। यह परेशानी तब और बढ़ जाती है जब सड़क चल रही बारात और वाहनों की पार्किंग एक ही जगह पर हो तो फिर घंटों के लिए जाम लग जाता है।

पुलिस व प्रशासन ने नहीं बनाई ठोस योजना

इस तरह से जाम न लगे इसके लिए पुलिस और प्रशासन कोई ठोस कार्य योजना नहीं बना सका। शहर की सड़कें सिकुड़ रही है। क्योंकि इन सड़कों से गुजरना अब मुश्किल हो रहा है। शहर की सड़क से बिना टकराए वाहन निकलकर ले जाना खुद में जंग जीतने से कम नहीं है। क्योंकि शहर की सड़कों पर लगे हाथ ठेले,खोमचे और वाहनों की पार्किंग ने सुगम यातायात को बाधित कर रखा है। लेकिन इस बाधा को दूर करने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस निर्वाह नहीं कर पा रही है। जबकि शहर की 10 लाख की आबादी को सुगम यातायात देने की जिम्मेदारी यातायात के 208 जवानों पर है। लेकिन ठोस प्लानिंग और आला अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह जवान भी यातायात सुधारने के नाम पर केवल चालानी कार्रवाई कर इतश्री कर ले ते है और परेशानी पूरे शहरवासी उठाते हैं।

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