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Friday, 16 October 2026
हरदा

कलश यात्रा के साथ शुरु हुई नानी बाई के मायरे की कथा

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 अनोखा तीर, मसनगांव। ग्राम में नानी बाई का मायरे की कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। कथा के प्रथम दिवस भगवान के परम भक्त नरसिंह मेहता की भगवान के प्रति अटूट भक्ति का मार्मिक वर्णन किया गया। कथा वाचन करते हुए बाल विदुशी देवी अंशिका ने कहा कि समय किसी का भी एक समान नहीं रहता, समय निरंतर बदलता रहता है। जिसके जीवन में दुख आता है, उसके जीवन में सुख भी अवश्य आता है। यही स्थिति भगवान के परम भक्त नरसिंह मेहता की थी। उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मात्र पांच वर्ष की आयु में उनके पिता का निधन हो गया था। उनका पालन-पोषण बड़े भाई और भाभी ने किया। बचपन से ही कृष्ण भक्ति में लीन रहने के कारण वे भगवान के अनन्य भक्त बन गए। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें गोलोक प्रदान किया और अपना रास दिखाया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि व्यक्ति को धैर्य रखकर समय बदलने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। भगवान के प्रति सदैव आसक्ति रखनी चाहिए तथा माता-पिता, गुरु और भागवत कथा की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए। भगवान अपने भक्त की प्रार्थना अवश्य सुनते हैं। भगवान कहते हैं कि भक्त भले ही एक बार उन्हें भूल जाए, पर वे अपने भक्त को कभी नहीं भूलते। कथा प्रारंभ से पूर्व ग्रामीणों द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा ग्राम के राधा-कृष्ण मंदिर से प्रारंभ होकर कथा स्थल तक पहुंची। वहां विशेष आरती के पश्चात विधिवत कथा का शुभारंभ किया गया।

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