अनोखा तीर, हरदा। एक बार भगवान शिव के नेेत्रों से अश्रु बह गया, जो भगवान शिव के करुणाभाव से निर्मित था। शिव की यह करुणा ही कृपा बन गई। उस अश्रु बिंदु से रुद्राक्ष के पेड़ का प्रादुर्भाव हुआ और उसका फल ही शिव स्वरूप रुद्राक्ष हो गया। अर्थात भगवान शिव की करुणा का रूपान्तरण ही रूद्राक्ष है। स्वयं रूद्र रूप है रुद्राक्ष। शिव को प्रिय है रुद्राक्ष। शिवभक्तों का श्रृंगार है रुद्राक्ष। भक्तों की भक्ति का कवच है रुद्राक्ष। उक्त बातें पं. श्याम मनावत ने ग्राम दुलिया में आयोजित शिवपुराण में व्यक्त किए। गुरुवार को शिव पुराण में शिव-पार्वती विवाह उत्सव मनाया गया। वेद ध्वनि, विपध्वनि, शंख ध्वनि के बीच पार्वती जी ने भगवान शिव को वरमाला पहनाई। श्रद्धा रूपी पार्वती ने शिव का वरण किया। पं. मनावत जी ने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्ति का मिलन नहीं है, वह दो विचारों का, दो आचारों का, दो कुलाचारों का और दो आत्माओं का मिलन है। सात जन्मों का सहचर बनना है।
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