बेमौसम बरसात…. देर शाम झमाझम बरसा पानी, सड़के तरबतर

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अनोखा तीर, हरदा। क्षेत्र में बेमौसमय बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। मौसम की यह बेरूखी बीतें चार दिनों से देखने को मिल रही है। इस बीच जहां आसमान में घने बादलों का डेरा है, वहीं रह-रहकर बूंदाबांदी का दौर जारी है। जिसके चलते वातावरण में ठंडा हो गया है। साथ ही सुबह-शाम कोहरे की आमद भी दर्ज हुई है। जिस वजह से दिल्ली की तरफ आने वाली ट्रेनें लेट चल रही है। इसका मुख्य कारण चंबल संभाग सहित मध्यप्रदेश की सीमा से सटे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं पंजाब समेत अन्य राज्य घने कोहरे की जकड़ में हैं। उधर, मौसम वैज्ञानिक अगले तीन-चार दिनों तक क्षेत्र में मौसम सक्रिय रहने का अनुमान जता चुके हैं। इधर, मौसम के करवट बदलने के साथ ही चना की फसल पर दांव लगाने वाले किसान चिंतित हैं। क्योंकि, क्षेत्र की काली एवं भारी कृषि भूमि में चने की फसल महज एक सिंचाईं में पककर तैयार हो जाती है। हालांकि, कुछ किसान 45 दिन के भीतर दो सिंचाईं करते हैं। जिसमें पहला पानी स्प्रिंगलर तथा दूसरा पानी सीधे खेत में छोड़ा जाता है। कुछ इसी तरह थोड़ी हल्की कृषि भूमि में भी यही सिंचाईं पद्धति अपनाई जाती है। इन सबके बीच इस साल रबी सीजन में कई चना उत्पादक किसान10 से 20 नवम्बर के बीच एक सिंचाईं कर चुके हैं। ठीक उसके बाद २७ नवम्बर की सुबह रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ, जो गुरूवार शाम को मूसलाधर बारिश मेें तब्दील हुआ है। ऐसे हालत में चना उत्पादक किसानों की चिंता लाजमी है। इसके पीछे मजबूत तर्क यह कि अभी तो फसल की बाल अवस्था है, आगे आधी से ज्यादा उम्र बाकी है।

तो हाथ केवल दवा छिड़काव

बेमौसम बारिश को लेकर किसानों का कहना है कि मौसम की बेरूखी के कारण चना की फसल पर विपरीत प्रभाव के आसार हैं। क्योंकि, बार-बार मौसम बदलने की वजह कीटप्रकोप बढ़ता है। ऐसी स्थिति में किसानों के हाथ केवल दवा का छिड़काव ही एकमात्र विकल्प है, जो फसल की सेहत व स्वास्थ्य को चुस्त-दुरूस्त तथा तमाम रोगों से लड़ने में मददगार साबित होता है।

दवा छिड़काव में जुटेंगे किसान  

उन्होंनें यह भी कहा कि अधिकांश किसानों ने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में चना की बुआई की है। यही बुआई कार्य 15 नवम्बर तक जारी रहा। इस हिसाब से चना की उम्र करीब एक से ड़ेढ महिने की हो चुकी है। जिसमें पहला स्प्रे करने के साथ ही चना की फसल में टॉनिक का स्प्रे करेंगे। इसकी सभी तैयारियां पूर्ण हैं। किसान केवल मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

इन किस्मों की बुआई ज्यादा 

डालर चना

काटू चना

72 गोल्ड

जेजे 202

जेजे 204

इन किस्मों का रकबा कम

जेजे 130

जॉकी 9218

विशाल

उज्जैन 21

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