धर्म पर नियंत्रण सत्ता का नहीं शास्त्र का हो : पं. मनावत

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अनोखा तीर, हरदा। ग्राम दुलिया में शिव महापुराण के भव्य आयोजन के चौथे दिन भगवती-पार्वती का जन्म महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। गीत संगीत पर भक्तों ने जी भरकर नृत्य किया। आयोजक परिवार के सुंदरलाल गौर, शिवनारायण गौर एवं जयनारायण गौर ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया। कथा व्यास मानस मर्मज्ञ पं. श्याम मनावत ने कहा कि सत्ता के शीर्ष पुरुष ने नितांत व्यक्तिगत कारणों से भगवन शिव को यज्ञ के भाग से वंचित कर दिया। इस घटना पर देवी सती ने अपना विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि यज्ञ में शिव का स्थान शास्त्र के मतानुसार होगा। न कि सत्ताधीश की इचछानुसार। यदि धर्म में सत्ता का हस्तक्षेप हुआ तो धर्म अपने मूल स्वरूप को खो देगा। धर्म शास्त्राधीन होना चाहिए न कि शासनाधीन। पं. श्याम जी मनावत ने कहा कि जब जब धर्म के क्रियाकलापों में दोष आता है, तब तब संत महापुरुष और धर्माचार्य संशोधन करते हंै। आद्य शंकराचार्य भगवान जगत गुरु रामानंदाचार्य आदि ने अनेक विसंगतियों को धर्म से निकालकर धर्म को अधिक कल्याणकारी बनाया। कथा श्रवण हेतु बड़ी संख्या में श्रोताओं ने पधारकर धर्म लाभ लिया।

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