अनोखा तीर, हरदा। देशभर में आवारा मवेशियों की समस्या दिनों-दिन विकराल होती जा रही है। जहां एक ओर आवारा मवेशी सड़क हादसों का सबब बन रहे हैं, तो दूसरी ओर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आज शहर हो या गांव, आवारा मवेशियों के आतंक से कोई अछूता नहीं है। इनके यत्र-अत्र-सर्वत्र घूमने से आमजन का अपने घर से बाहर निकलना दूभर हो रहा है। कई बार इनकी चपेट में आकर नागरिकों की मौत भी हो चुकी है। कई बार आवारा मवेशियों की आपसी लड़ाई के कारण वाहन चालक और आमजन घायल हो जाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण आवारा मवेशी भी हैं, जो यातायात व्यवस्था को तो बाधित करते ही हैं, साथ ही उनके अचानक बीच सड़क पर आ धमकने से सड़क हादसे भी अंजाम लेते हैं। ग्राम कुकरावद के कृषक भैयालाल ने बताया कि वर्तमान में उनके खेत में गेहूं चने की फसल लगी है, आवारा मवेशियों के कारण उन्हें दिन रात कड़ाके की ठंड में रखवाली करनी पड़ रही है। गांव के अधिकांश किसानों की फसलें आवारा मवेशी चट कर रहे हैं। गांव में गौशाला तो बनी हुई है, लेकिन वहां पर मवेशियों के चारे की व्यवस्था नहीं है। एक निश्चित राशि लेने के बाद भी गौशाला से आवारा मवेशियों को भगा दिया जाता है। वह बताते हैं कि गर्मी और बारिश में तो जैसे-तैसे करके किसान रात में खेत की निगरानी कर आवारा मवेशियों से अपनी फसलों को बचाते आये हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड में रात के समय खेतों की रखवाली मुश्किल हो जाता है और न आर्थिक रूप से इतने सक्षम हैं कि इतने बड़े खेत के चहुंओर तारबंदी कर आवारा मवेशियों से अपने खेत की सुरक्षा कर सके। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी तादाद में सड़कों और गांव में आवारा मवेशी कैसे घूम रहे हैं, कौन है इनका असली मालिक? साथ ही इनसे होने वाले नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है? पशुपालन और डेयरी विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 20वीं पशुधन गणना से ज्ञात होता है कि देश में 50.21 लाख आवारा मवेशी सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। हरदा जिले की ही बात करें तो हजारों की तादाद में आवारा मवेशी विचरण कर रहे हैं। देखने वाली बात यह भी है कि जिले में कई गौशालाएं स्थापित हैं, उन्हें शासकीय अनुदान भी प्राप्त होता है, लेकिन इन गौशालाओं में भी आवारा मवेशियों के लिए कोई स्थान नहीं है।
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