अनोखा तीर, हरदा। हरदा विधानसभा के २७४ मतदान केंद्रों पर १७ नवंबर को मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई। २ लाख ३५ हजार ९२१ मतदाताओं में से १ लाख ९५ हजार १८५ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कुल ८२.७३ प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे सर्वाधिक मतदान की बात करें तो ग्राम सोनखेड़ी के बूथ क्र.७२ में हुआ। यहां ५६७ मतदाताओं में से ५३३ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए ९४ प्रतिशत मतदान किया। सबसे कम मतदान हरदा के बूथ क्र. ८० में हुआ। यहां १४५२ मतदाताओं में से मात्र ८७२ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। लेकिन इस मतदान केंद्र की खास बात यह रही कि यहां पर जहां पुरुषों का मत प्रतिशत ५२ प्रतिशत था, वहीं महिलाओं का प्रतिशत ७०.८३ प्रतिशत था। जबकि अन्य मतदान केंद्रों की बात करें तो पुरुषो ने अधिक मतदान किया है। वहीं महिलाएं पीछे रहीं। सर्वाधिक मतदान की बात करें तो उंढाल में ९१.६१ प्रतिशत, नीलगढ़ में ९०.९७ प्रतिशत, नीमगांव में ९०.७६ प्रतिशत, नहाड़िया में ९१.५९ प्रतिशत, अतरसमा में ९१.१५ प्रतिशत, देवास में ९०.७३ प्रतिशत, आदमपुर में ९२.३९ प्रतिशत, सुरजना में ९०.२० प्रतिशत, अजनई में ९१.६१ प्रतिशत, जिजगांव, डगांवानीमा, अबगांव खुर्द, मझली में ९० प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। वहीं कुकरावद के केंद्र क्र.१५२ में भी ९२.०६ प्रतिशत मतदान हुआ है। भाजपा प्रत्याशी कमल पटेल के गृह ग्राम बारंगा में ८५.२० प्रतिशत, रातातलाई में ८४. और ८९ प्रतिशत मतदान हुआ है। खिरकिया के शहरीय क्षेत्र की बात करें तो खिरकिया के कुछ केंद्रों पर ८७ प्रतिशत तक ही मतदान हुआ है। आदिवासी क्षेत्र मोरगढ़ी की बात करें तो यहां पर ८९ प्रतिशत तक मतदान हुआ है। २०१८ के चुनाव में कुल १ लाख ७२ हजार ९३५ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। ५ वर्ष बाद २०२३ में २२ हजार २५० अधिक मत डले हैं। इतने ही नव मतदाताओं की संख्या बताई जा रही है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि युवा मतदाता ही इस चुनाव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। वर्ष २०१८ की बात करें तो भाजपा प्रत्याशी कमल पटेल को ८५ हजार ६५१ मत प्राप्त हुए थे। वहीं कांग्रेस के डॉ.आरके दोगने को ७८ हजार ९८४ मतों से संतोष करना पड़ा था। इस बार चुनाव में जिस प्रत्याशी को ९८ हजार से अधिक मत प्राप्त होंगे, उसी के सिर पर जीत का सहरा सजेगा।
राजनीतिक पंडित भी नहीं कर पा रहे आंकलन
वर्षों से जीत हार की भविष्यवाणी करने वाले राजनीतिक पंडित भी हरदा विधानसभा के इस चुनाव को समझने में अब तक कामयाबी नहीं पा सके हैं। कांग्रेस और भाजपा के नेता और कार्यकर्ता भी १०० प्रतिशत यह भविष्यवाणी नहीं कर पा रहे हैं कि हम जीत रहे हैं और इतने हजार से जीत रहे हैं। सोशल मीडिया जो चुनाव से पहले तक जीत-हार और आरोप-प्रत्यारोप कर राजनीति से ओतप्रोत दिखाई दे रहा था, उस पर भी अब शांति छाई हुई है। राजनीतिक पंडितों को यह गणित लगाना मुश्किल हो रहा है कि सही मायने में पलड़ा किस ओर झुका हुआ है। हां इतना जरूर है कि लोग इतना कह रहे हैं कि चुनाव की रात बड़ा उलटफेर करने का प्रयास किया गया है। यदि यह सफल रहा तो यह जीतेगा और यदि यह फंडा नहीं चला तो वो तो जीत ही रहा है। अब परिणाम तो ३ दिसंबर को ही सामने आएंगे, लेकिन प्रत्याशियों के साथ ही उन लोगों की भी नींद तब तक उड़ी रहेगी, जिन्होंने इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का चुनाव बना लिया था। जिसके लिए उन्होंने आरोपी प्रत्यारोप से लेकर वह सारी राजनीति करी जो अब उन्हें यदि चुनाव हार गए तो बहुत महंगी पड़ना तय दिखाई दे रही है।
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