मुक्तिधाम को संवारने तन-मन से जुटे समाजसेवी

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मुक्तिधाम में शिव की साधनारत प्रतिमा

मुख्यद्वार अब मोक्षद्वार के रूप में तैयार

अनोखा तीर, हरदा। शहर में अजनाल नदी के किनारे कई दशक पुराना मुक्तिधाम अब बदला-बदला दिखाई देने लगा है। इसे संवारने के लिए समाजसेवियों ने जो संकल्प लिया, वो अनवरत जारी है। वहीं इस पुण्यदायी कार्य को लेकर सहयोगियों का उत्साह बरकरार है। जिसके चलते मुक्तिधाम में नित नई-नई सुविधाओं का विस्तार कार्य जोरों पर है, जो कि अंतिम यात्रा में यहां पहुंचने वाले लोगों को राहत व सुकून प्रदान कर रहा है। जबकि इससे पहले मुक्तिधाम में कोई खास इंतजाम नही थे। जिसके चलते लोगों को असुविधाओं से दो-चार करना लाजमी था। हालांकि पूर्व में यहां जिपं की योजनाअंर्तगत एक बड़ा सामुदायिक भवन जरूर बना है। परंतु एक तरफ तथा अस्वच्छ होने की वजह से लोग उस हॉल में उठने-बैठने से परहेज करते थे। इसके अलावा अंदर और बाहर की बाउंड्रीवाल तथा लकड़ी-कंडे रखने का समुचित इंतजाम पहले से था। खैर, ये सब शासकीय कार्ययोजनाएं हैं। किंतु इन सबके बीच विगत वर्षो से मुक्तिधाम को संवारने में जुटे समाजसेवी आम जनमानस के विचारों को तबज्जों दे रहे हैं। उन्हीं तमाम बिन्दूओं का अनुशरण कर सुविधाजनक कार्यो को पूरा करने में तल्लीन हैं। इन सबमें समाजवेसी एवं शिवभक्त शरद सराफ शीर्ष पर हैं। जो कड़ी से कड़ी जोड़कर मुक्तिधाम की तस्वीर बदलने को आतुर हैं। बढ़ती उम्र उनकी लगन में जरा बाधा नही डाल रही। जिस प्रकार आमजन दिन उगते ही अपनी नौकरी-चाकरी, खेती-बाड़ी और दुकानदारी समेत नियमित दिनचर्या में जुटते हैं। उसी तरह श्री सराफ हर सुबह सीधे मुक्तिधाम ेका रूख करते हैं। यहां निर्माणधीन कार्यो की देखरेख, दीवारों की तराई समेत जो काम हाथ लगा, उसमें भीड़ जाते हैं। परिणामस्वरूप बीतें दो-तीन साल में मुक्तिधाम की तस्वीर आप हम सबके सामने हैं। मुक्तिधाम में बेहतर सुविधाओं को लेकर शरद सराफ ने कहा कि ये सब पूज्य गुरूदेव पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। उन्हीं की प्रेरणा से शिव मंदिर तैयार कर वहां विशाल प्रतिमा स्थापित की है। गुरूदेव के आदेश से यह पुण्य एवं धार्मिक कार्य आत्मशांति का मुख्य केन्द्र हैं।

कुर्सियां बढ़ाने से मिली राहत

बता दें कि मुक्तिधाम में बैठक व्यवस्था के लिहाज से समाजसेवियों ने करीब 40 सीमेंट की कुर्सियां यहां लगवाई हैं। जिसके चलते लोगों को सुविधा मिली है। जबकि इसे पहले केवल दाह संस्कार प्रांगढ़ में कुर्सियां लगी थी, जो कि संख्या के मान से कम पड़ जाती थी। परंतु अब 40 कुर्सियां ओर रखे जाने से व्यवस्था का विस्तार हुआ है। जिसके चलते अंदर, बाहर और मंदिर प्रांगढ हर जगह बैठक व्यवस्था सुदृढ़ हो चुकी है।

धूप और बारिश से निजात  

इसके अलावा गर्मी के दिनों में तीखी धूप तथा बारिश में भीगने से बचने के लिए नए टीनशेड बनाएं गए हैं। साथ ही दाह संस्कार स्थल के सामने बड़े-बड़े शेड़ तथा शव रखने के लिए स्टैंड बनाएं हैं, ताकि शव को जमीन पर रखने के बजाय वहां रखा जा सके। वहीं पंच लकड़ी के लिए कुंड भी बनाएं हैं। इन सबके अलावा मुक्तिधाम में पौधरोपण को भी प्राथमिकता में रखा गया है। समाजसेवियों के मुताबिक आगे स्वच्छ व शुद्ध पेयजल का इंतजाम करेंगे।

 

 

पहले भव्य शिव प्रतिमा, अब मोक्षद्वार तैयार

समाजसेवियों के सार्थक प्रयासों के चलते मुख्यालय स्थित मुक्तिधाम का कायाकल्प मानो अंतिम चरण में है। पहले यहां विशाल शिव प्रतिमा की स्थापना की है, जो कि खंडवा रोड से साफ दिखाई देती है। नदी किनारे यह नजारा राहगिरों का मन मोह लेता है। मंदिर के ऊपर बनाई गई प्रतिमा के चारों तरफ जहां हरियाली छाई है, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से जगह से तार फेंसिंग से सुरक्षित किया है। इसी के साथ अब मुक्तिधाम के मुख्यद्वार को मोक्षद्वार के रूप में संवारा गया है। जिसे कुशल कलाकारों ने आकार दिया है। यह मोक्षद्वार करीब डेढ़ महिने में बनकर तैयार हुआ है। इसके अलावा द्वार से लगी दीवार का भी सुधार कार्य हुआ है।

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