प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

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-मरीजों को नहीं मिल पा रहा समुचित उपचार

अनोखा तीर, मसनगांव। ग्राम मसनगांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र के ग्रामीणों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है। केंद्र में नर्सिंग स्टाफ और ड्रेसर की नियुक्ति नहीं होने से ग्लूकोज चढ़ाने, इंजेक्शन लगाने तथा मरीजों को भर्ती कर उपचार देने जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल अथवा अन्य बड़े स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कराया गया है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों के अभाव में इनका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। मसनगांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी इसी समस्या से जूझ रहा है, जहां प्रतिदिन 35 से 40 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अधिकांश मामलों में केवल दवाइयां देकर वापस भेज दिया जाता है।
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की जांच भी प्रभावित
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान योजना के अंतर्गत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था होना आवश्यक है। इसके लिए महिला चिकित्सकों की उपलब्धता भी जरूरी मानी गई है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में केवल दो चिकित्सक पदस्थ हैं, जिनमें एक एलोपैथिक तथा एक आयुर्वेदिक चिकित्सक शामिल हैं। महिला चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ के अभाव में गर्भवती महिलाओं को भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
डेढ़ करोड़ की लागत से बना भवन, सुविधाएं अधूरी
ग्रामीण गणेश मुकाती, योगेश पाटिल और रोहित भायरे ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र का भवन लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया गया है, लेकिन भवन बनने के बाद भी आवश्यक मानव संसाधनों की नियुक्ति नहीं की गई। स्टाफ नर्स, ड्रेसर और अन्य तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं सीमित होकर रह गई हैं। मरीजों को ग्लूकोज लगाने, इंजेक्शन देने अथवा प्राथमिक उपचार के बाद निगरानी में रखने की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है।
स्टोर कीपर भी सप्ताह में दो दिन ही उपलब्ध
स्वास्थ्य केंद्र में दवा वितरण और अन्य व्यवस्थाओं के लिए स्टोर कीपर की नियुक्ति तो की गई है, लेकिन उन्हें सिराली स्वास्थ्य केंद्र का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ऐसे में वे सप्ताह में केवल दो दिन ही मसनगांव स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित रह पाते हैं। इससे दवा प्रबंधन और प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सुरक्षा के लिए गार्ड की नियुक्ति नहीं होने से भवन सूना बना रहता है। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार यहां 24 घंटे मरीजों को उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए, लेकिन दुर्घटना अथवा गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हरदा ले जाना पड़ रहा है।
गर्मी में चिकित्सक और मरीज परेशान
भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य केंद्र में वाटर कूलर और कूलर जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। इससे मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में उपचार के लिए आने वाले लोगों को पेयजल और ठंडक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिल पाती।
सात से अधिक गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र
मसनगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के सात से अधिक गांवों के लोग उपचार के लिए निर्भर हैं। इसके बावजूद पर्याप्त स्टाफ, उपकरण और उपचार सुविधाओं की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से स्टाफ नर्स, ड्रेसर, महिला चिकित्सक सहित अन्य आवश्यक पदों पर नियुक्तियां करने तथा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
इनका कहना है…
मसनगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी बनी हुई है। ड्रेसर, नर्सिंग स्टाफ और गार्ड की नियुक्ति के लिए पत्र लिखा गया है। जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक हंडिया या हरदा से नर्स की ड्यूटी लगाई जाएगी। जल्द ही व्यवस्था बनाकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
एचपी सिंह, सीएमएचओ, जिला चिकित्सालय हरदा
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