श्रीमद्भागवत कथा में खेली फूलों की होली, रुक्मिणी विवाह में उमड़े श्रद्धालु

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM
-राधा-कृष्ण मंदिर में भक्ति और उल्लास के बीच संपन्न हुआ रुक्मिणी विवाह उत्सव

अनोखा तीर, मसनगांव।  ग्राम के राधा-कृष्ण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस भक्तिमय वातावरण के बीच भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के दिव्य विवाह का आयोजन किया गया। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे तथा फूलों की होली खेलकर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरे परिसर में भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। कथावाचक पंडित ओमप्रकाश शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल और शिक्षा ग्रहण करने की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि नामकरण संस्कार के बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम शिक्षा प्राप्त करने के लिए उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम पहुंचे थे। वहां उन्होंने गुरु सांदीपनि से मात्र 64 दिनों में समस्त विद्याओं और कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया। गुरुदक्षिणा के समय भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु के दिवंगत पुत्र को वापस लाकर गुरुदक्षिणा अर्पित की, जिससे गुरु-शिष्य परंपरा की महानता स्थापित हुई। उन्होंने बताया कि गुरु ही मनुष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है और गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पावन प्रेम प्रसंग का वर्णन करते हुए रुक्मिणी मंगल की कथा सुनाई गई। बताया गया कि रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार करते हुए संदेश भेजा था। भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया और धर्म तथा प्रेम की स्थापना की। इसके बाद कथा स्थल पर रुक्मिणी विवाह का भव्य आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने विवाहोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया और मंगल गीतों के बीच भगवान का पूजन-अर्चन किया। पंडित शर्मा ने तुलसी विवाह का महत्व बताते हुए कहा कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी पूजन और तुलसी विवाह से घर-परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। उन्होंने कहा कि मंदिर, गुरु और बेटी के घर कभी भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह हमारी संस्कृति और संस्कारों का प्रतीक है। कथा के दौरान उद्धव और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने संसार को प्रेम, सेवा और समर्पण का संदेश दिया। उद्धव की कथा मनुष्य को भक्ति और वैराग्य का मार्ग दिखाती है। साथ ही जरासंध और कालयवन क

0 Views

Leave a Reply

लेटेस्ट न्यूज़

MP Info लेटेस्ट न्यूज़

error: Content is protected !!