नवरात्र में खड़ा होगा बिजली का बड़ा संकट

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भोपाल- मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी की इकाइयों से क्षमता से कम उत्पादन किया जा रहा है और तीन इकाइयां तकनीकी खराबी के कारण बंद चल रही हैं। ऐसे में, नवरात्र के समय जब प्रदेशभर में बिजली की मांग बढ़ेगी, तब बिजली कंपनी को निजी इकाइयों से महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्हें बिजली के लिए ज्यादा बिल भुगतान करना होगा।
प्रदेश में थर्मल पावर प्लांट की क्षमता 5400 मेगावाट है, जबकि 2645 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। वहीं हाइड्रल पावर प्लांट की क्षमता 2435 मेगावाट है, जिसकी तुलना में महज 1660 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है। इसमें सिंगाजी की 660 मेगावाट की एक इकाई को ओवरहालिंग में रखा गया है। इस वजह से बिजली का उत्पादन बंद है।

यही स्थिति बिरसिंहपुर पावर प्लांट में एक नंबर इकाई ओवर हालिंग में है, जबकि पांच नंबर की 500 मेगावाट वाली इकाई से बायलर ट्यूब लीकेज की वजह से उत्पादन बंद चल रहा है। वर्तमान में 13 अक्टूबर की सायं सात बजे 12800 मेगावाट बिजली की मांग प्रदेश में बनी हुई थी।
बिजली मामलों के जानकार बताते हैं कि नवरात्र के समय बिजली की मांग अचानक से बढ़ेगी। घरों और सडक़ों पर दुर्गा पंडाल के लिए रोशनी की अतिरिक्त जरूरत होगी। कृषि पंप का संचालन भी शुरू हो जाएगा। इसके बाद मांग 16 हजार मेगावाट के आसपास पहुंचने की उम्मीद है। नतीजतन, पहले से ही कम हो रहे बिजली उत्पादन के कारण मांग की पूर्ति निजी कंपनियों के महंगे रेट पर खरीदारी से करने का ही विकल्प बाकी है। 698 मेगावाट अतिरिक्त मांग प्रदेश में 13 अक्टूबर की शाम को तय उपलब्धता से अधिक बिजली की जरूरत हुई, जिस वजह से ग्रिड से 698 मेगावाट बिजली ओवर ड्रा की गई। प्रदेश में करीब सात बजे के आसपास मांग 12906 मेगावाट बनी हुई थी। इसमें मप्र जेनको के थर्मल से 2645 मेगावाट, हाइड्रल से 1660 मेगावाट और 7207 मेगावाट का शेड्यूल किया गया था।

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