ग्राम बोबदा में वन अमले पर मारपीट का आरोप

अनोख तीर, हरदा/ रहटगांव। जिले के रहटगांव थानाक्षेत्र में वन ग्राम बोवदा में वन अमले ने ग्रामीण के साथ मारपीट का मामला थमने का नाम नही ले रहा है। इसको लेकर ग्रामीण आदिवासियों में खासी नाराजगी है। इसी मामले में कांग्रेस नेता अभिजीत शाह की अगुवाई में शुक्रवार को मुख्यालय पहुंचे आदिवासियों ने वन दफ्तर का सांकेतिक घेराव कर अपना विरोध जताया है। साथ ही वन प्रबंधन पर तानाशाह रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया है। वहीं घटना को अंजाम देने वाले अधिकारी-कर्मचारी के विरूद्ध कार्रवाई की मांग दोहराई है। इस मौके पर आदिवासियों ने वन प्रांगढ़ में जमकर नारे भी लगाए। कांग्रेस नेता अभिजीत शाह ने कहा कि क्षेत्र के आदिवासियों के साथ बुरा बर्ताव थमने का नाम नही ले रहा है। वहीं दूसरी ओर शिकायत करने के बावजूद जिला एवं पुलिस प्रशासन की कार्रवाई संतोषजनक नही है। जबकि प्रदेश के मुखिया समेत कई नेता भाजपा के राज में आदिवासियों के उत्थान की बातें करते-करते थकते नही हैं। किंतु , मैदानी हकीकत कुछ ओर ही है। उन्होंनें यह भी कहा कि प्रदेश सरकार को इसकी पड़ताल करने की जरूरत है। बता दें कि मामला करीब 20 दिन पहले का है। ग्राम बोवदा के शंकर पिता हरिमन का आरोप था कि पट्टा मांगने पर फारेस्ट के डिप्टी रेंजर और वन रक्षक ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। यह पूरा घटनाक्रम गांव के अन्य लोगों के सामने घटित हुआ। १८ अगस्त को रहटगांव थाना पहुंचकर मामले की शिकायत की। लेकिन प्रकरण कायम करने के बजाय महज आवेदन लेकर उन्हें जांच का भरोसा दिलाया था। जब, समय-सीमा में कोई कार्रवाई नही हुई तो ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा है। इस मौके पर ग्रामीणों के साथ अभिजीत शाह, जनपद सदस्य अनिल लिबर्टी, गंगाराम पटेल सहित अन्य लोग मौजूद थे।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर लगाई थी गुहार
पीड़ित के मुताबिक करीब एक सप्ताह तक कोई कार्रवाई नही होने के बाद ग्रामीणों के साथ २८ अगस्त को कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। जहां अधिकारी को पूरा घटनाक्रम बताते हुए कार्रवाई की मांग दोहराई। बावजूद कार्रवाई दो कदम आगे नही बढ़ी। इन सब बातों से आहत आदिवासियों ने शुक्रवार को अभिजीत शाह के नेतृत्व में वन दफ्तर का सांकेतिक घेराव कर विरोध जताया है।
अन्यथा उग्र आंदोलन को बाध्य
इधर, कांग्रेस नेता अभिजीत शाह इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं। मुख्यालय स्थित वन दफ्तर का सांकेतिक घेराव इसका संकेत दिया है। उन्होंनें कहा कि वनग्रामों में इस तरह का बर्ताव असहनीय है। इस संबंध में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराते हुए विभाग को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है। अन्यथा ग्रामीणों के साथ उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
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