सालों से रूकी पदोन्निति की कार्रवाई को रफ्तार देने की मांग

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संयुक्त कृषि मोर्चा के बैनर तले बुलंद की आवाज, सौंपा ज्ञापन

 

लगातार 7 सालों से कृषि कर्मठ अवार्ड अपने नाम करने वाले मध्यप्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो यह दर्शाता है कि राज्य में कृषि तथा सिंचाई समेत उससे जुड़ी सभी कार्ययोजनाओं का निर्वहन बखूबी जारी है। जबकि, दूसरी ओर इन तमाम योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने वाला कृषि महकमा आहत दिख रहा है। कारण, सालों से लंबित मांगों का समाधान नही हुआ है। इसको लेकर बुधवार को कृषि संयुक्त मोर्चा की अगुवाई में विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांगों की तरफ शासन का ध्यान दिलाने का प्रयास किया है।  

 

अनोखा तीर, हरदा। जिले का कृषि महकमा शासन की मंशा अनुरूप समस्त कृषक हितैषी योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन में विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों सक्रिय सहभागिता जारी है। जिसके परिणामस्वरूप लगातार सात सालों से मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड मिल रहा है। साथ ही प्रदेश की कृषि विकास दर विगत 10 वर्षों से 18 प्रतिशत से ऊपर बरकरार है। इतना ही नही, प्रदेश सरकार की कृषक हितैषी योजनाओं के माध्यम से पात्र लोगों को लाभान्वित करने का सिलसिला जारी है। जिसके सार्थक परिणाम सरकार के समक्ष हैं। यह बातें कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक अधिकारी को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपते समय कृषि संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष एमपीएस चन्द्रावत ने कही। उन्होंनें यह भी कहा कि विभागीय अमला अपनी मूल संरचना से लगभग 25 प्रतिशत संख्या के बावजूद योजनाएं के बेहतर क्रियान्वयन समेत सभी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। इन सबके बीच विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारियों को अन्य विभागों की तुलना में उपेक्षाओं का शिकार हैं। यही वजह है कि अधिकारी-कर्मचारियों ने अपनी मांगों की तरफ ध्यान दिलाने के लिये बुधवार को ज्ञापन सौंपा है। जिसके माध्यम से संयुक्त कृषि मोर्चा ने अपनी 7 सूत्रीय मांगों का अविलंब समाधान करने की मांग दोहराते हुए आगामी 11 सितम्बर तक का अल्टीमेटल दिया है, अन्यथा 12 सितम्बर से आंदोलन का संकेत दे दिया है। श्री चन्द्रावत ने बताया कि इस बीच अगर सरकार किसी समाधानजनक निष्कर्ष पर नही पहुंचती है तो आंदोलन को बाध्य होंगे।

 

एक गांव में एक कर्मचारी का डेरा

ज्ञापन में यह भी उल्लेखित है कि अगले चरण अंतर्गत 12 सितम्बर को प्रदेश एवं जिला स्तर पर सामूहिक धरना एवं प्रदर्शन की तैयारी है। वहीं इसी क्रम में 19 सितम्बर को सभी अधिकारी-कर्मचारी एक दिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर एक गांव में एक कर्मचारी रात्रि विज्ञाम करेगा। इस दौरान वहां के किसानों के साथ उन्नत कृषि समेत अन्य बिन्दूओं पर चर्चा की जाएगी।

 

ज्ञापन सौंपते समय इनकी मौजूदगी

बता दें कि सालों से लंबित मांगों को लेकर कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बुधवार को ज्ञापन सौंपते समय एकजुट दिखे। इस मौके पर जिला अध्यक्ष एमपीएस चन्द्रावत, कमलेश भादेकर, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ के अध्यक्ष तुलसीराम चौहान, एसके जैन, वीरेन्द्र साहू एवं जिला सलाहकार रमेश सिंह तोमर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 मोर्चा की प्रमुख मांगें…..

– वर्ष 2016 से ही पदोन्नति नही होने के कारण रिक्त पड़े सभी उच्च पदों पर कोष एवं लेखा, वित्त विभाग, राजस्व तथा पुलिस विभाग की तरह पांच स्तरीय वेतनमान के साथ ही पदनाम भी दिया जाए।

– वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड स्तर का पद होने से वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कैडर को राजपत्रित घोषित किया जाए। प्रदेश में सभी विभागों के विकासखंड स्तर के अधिकारी राजपत्रित है।

– ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ग्रेड पे-3200, कृषि विकास अधिकारी ग्रेड पे 3600 एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ग्रेड पे- 4200 वेतनमान दिया जाए।

– सीएम की घोषणा अनुरूप विभाग में नवनियुक्त सभी परिवीक्षाधीन कृषि अधिकारियों को दूसरे साल से 100 प्रतिशत वेतन देने पर अमल किया जाए।

– विभाग के संचालक कृषि के दोनों पदों को विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से भरा जाए।

– कृषि विकास अधिकारी से संचालक कृषि के मध्य सभी रिक्त पदों को वरिष्ठता के आधार पर भरें।

– सबसे प्रमुख पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने की मांग पर जोर दिया गया।

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