प्रदेश में सबसे अधिक आवास पूर्ण करने वाली पंचायत खरगोन जिले में

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प्रधानमंत्री आवास के साथ मिला स्व-रोजगार

जनजातीय बहुल क्षेत्र होने के कारण पंचायत क्षेत्र में कच्चे मकान ज्यादा थे। इस वजह से प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति पात्र हितग्राहियों को बड़ी संख्या में जारी की गई। धूलकोट ने अनोखी डिजाइन के आवास के कारण अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। सरपंच सालकराम किराड़े बताते हैं कि पक्की छत वाले मकान जनजातीय समुदाय के पूर्वजों की मान्यता अनुसार मान्य नहीं होते हैं। इस वजह से धूलकोट में तकरीबन 70 आवास ढाल वाली डिजाइन में बने हैं। ढाल के साथ छत पर कहीं-कहीं इंगलिश कवेलू और कहीं परम्परागत कवेलू का उपयोग किया गया है। इससे घर की सुंदरता में चार चाँद लग जाते हैं।

पीएम आवास में स्व-रोजगार

प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभान्वित मोरसिंह हबजिया कनोजे बताते हैं कि 3 वर्ष पहले उनका घर बाँस से बना कच्चा मकान था। कच्चे मकान के आँधी-बारिश में हमेशा गिरने का डर बना रहता था। पीएम आवास की स्वीकृति मिलने पर आवास बनाने में उन्होंने स्वयं मजदूरी की। पहले वे दूसरे के खेतों में मजदूरी किया करते थे। अब पक्के मकान में किराना दुकान चला रहे हैं, जिससे अब उन्हें 200 रूपये प्रतिदिन की आय भी हो रही है। धूलकोट में ऐसे कई हितग्राही हैं, जिनके जीवन में बदलाव आया है।

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