3 साल से नहीं मिला मूंग-चना का किराया

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-बिना भुगतान शुरू हुआ उठाव तो दी आंदोलन की चेतावनी
-वेयरहाउस ओनर्स एसोसिएशन ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

अनोखा तीर, भैरुंदा। क्षेत्र के वेयरहाउस संचालकों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक गोदामों में रखी शासकीय उपज मूंग, चना और सोयाबीन का किराया लंबे समय से नहीं मिलने के कारण परेशान वेयरहाउस ओनर्स एसोसिएशन ने शुक्रवार को अनुविभागीय अधिकारी एसडीएम को शिकायती ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। संचालकों का आरोप है कि एक तरफ पिछले तीन वर्षों का करोड़ों रुपए का किराया बकाया है वहीं दूसरी तरफ प्रशासन ने अब गोदामों से मूंग का उठाव भी तेज कर दिया है। संचालकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही संपूर्ण बकाया किराए का भुगतान नहीं किया गया और उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह गोदामों से स्टॉक का उठाव पूरी तरह बंद कर देंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश संचालकों ने गोदाम निर्माण के लिए बैंकों से लोन लिए थे। पिछले तीन साल से किराया नहीं मिलने के कारण वह बैंकों की मासिक किस्तें और लोन का ब्याज चुकाने में पूरी तरह असमर्थ हो रहे हैं। बैंक प्रबंधन द्वारा डिफाल्टर घोषित करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, दैनिक खर्चे, बिजली बिल और वेयरहाउस में तैनात कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करना भी अब संचालकों के बस से बाहर हो चुका है। जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
रखरखाव और कीटनाशक उपचार ठप
वेयरहाउस संचालकों के मुताबिक फंड की किल्लत के कारण गोदामों की आवश्यक मरम्मत, समय पर होने वाला कीटनाशक उपचार और सुरक्षा व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। संचालकों ने अंदेशा जताया है कि यदि गोदामों में वैज्ञानिक तरीके से समय पर रखरखाव नहीं हुआ तो वहां भंडारित करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय उपज खराब हो सकती है। जिससे सीधे तौर पर शासन को राजस्व की बड़ी क्षति होगी।
उठाव के समय आ रही 2 से 3 प्रतिशत की घटती
ज्ञापन में संचालकों ने एक मुद्दा उठाते हुए कहा कि वर्तमान में गोदामों से जो मूंग का उठाव किया जा रहा है, उसमें वजन में 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक की कमी घटती आ रही है। इसका मुख्य कारण ग्रीष्मकाल और लंबे समय तक भंडारण के कारण अनाज में रहने वाली प्राकृतिक नमी का सूखना है। संचालकों ने मांग की है कि उठाव के समय अनाज में नमी का प्रतिशत नोट किया जाए और भंडारण के समय की नमी के प्रतिशत से अंतर के अनुसार आई वजन की कमी को वैध मान्य किया जाए। इसके लिए किसी भी संचालक की आर्थिक कटौती न की जाए।
डब्ल्यू एचआर के बजाय ऑक्शन विक्रय रेट से हो कटौती
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि नमी के कारण होने वाली वजन की हानि के अतिरिक्त भी गोदाम स्कंद में उठाव के समय कोई कमी पाई जाती है तो उसकी कटौती डब्ल्यू एचआर के रेट से न करते हुए, ऑक्शन के विक्रय रेट से की जानी चाहिए, ताकि संचालकों पर अनुचित वित्तीय बोझ न पड़े। वेयरहाउस ओनर्स एसोसिएशन ने इस मामले में हस्तक्षेप और कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर प्रबंध संचालक मार्केफेड, भोपाल, ब्रांच मैनेजर एनसीसीएफ, भोपाल और स्टेट हेड नाफेड भोपाल से भी मांग की है।
समाधान न होने पर करेंगे मूंग खरीदी का बहिष्कार
संगठन का कहना है सरकार के द्वारा यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता है तो हमें मजबूरी में मूंग की खरीदी से अपने हाथ खींचने होंगे। इस दौरान मूंग खरीदी के लिए कोई भी संचालक अपना वेयरहाउस सरकार को किराए पर नहीं देगा। इस दौरान यदि सरकार के द्वारा अनावश्यक रूप से दबाव बनाया जाता है तो उसके लिए भी हम मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार है। हम सरकार के फायदे के लिए लगातार नुकसान झेलने की स्थिति में नहीं है। संगठन के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि हमारी मांगे पूरी नहीं होने पर हम मूंग की खरीदी से पूरी तरह विरक्त रहेंगे।

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