वर्तमान को संवारने के लिये दांव पर लगीं भविष्य की तैयारी
अनोखा तीर, हरदा। इस साल वर्षा ऋतु में बारिश का आंकड़ा औसत वर्षा से काफी दूर है, जिससे वर्तमान पर बुरा असर पड़ने के साथ साथ भविष्य पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसा इसलिये, क्योंकि बारिश का समय लगभग खत्म होने की कगार पर है। इस बीच किसानों को चालू सितम्बर माह में पानी से खासी उम्मीदें हैं, ताकि क्षेत्र का वर्तमान और भविष्य दोनों सुरक्षित किया जा सके। जानकारी के अनुसार इस साल अल्प वर्षा के चलते फसलों के हालात नुकसानी की कगार पर पहुंच गये हैं। इन सबके बीच जिन किसानों के पास निजी जल स्त्रोत हैं, वे लोग सिंचाईं प्रारंभ कर चुके हैं। जबकि जिन खेतों में सिंचाईं का निजी इंतजाम नही होने के कारण उन खेतों में फसलों का बुरा हाल है। पानी की लंबी खेंच ऊपर से तेज धूप के चलते खेतों की नमी दिन ब दिन टूट रही है। जिस वजह से फसलों की प्यास बढ़ रही है। ऐसे में फसलों को पर्याप्त पानी की नितांत जरूरत है। जिसके अभाव में क्षेत्र के किसान चिंता में डूबे हुए हैं। किसानों के मुताबिक यदि यही हालात बने रहे तो रबी सीजन की फसलें भी प्रभावित होना लाजमी है। इन हालातों के बीच कृषि वैज्ञानिक इसका संकेत दे चुके हैं।
कीट पर नियंत्रण पाने के जतन
यहां मौसम की बेरुखी के कारण फसल में भी कई तरह की कीट व्याधि की शिकायत सामने आ रही हैं। किसान दवाओं का छिड़काव कर इस समस्या से निजात पाने में जुट गये हैं। इससे फसल की लागत में बढ़ोत्तरी हो रही है। किसानों ने कहा कि अगर समय-समय पर पानी मिलता रहे तो फसलों की सभी प्रक्रियाएं सकुशल पूर्ण होती हैं। परंतु इस साल दम तोड़ रही फसलों को किसान पानी देकर संभालने की पूरजोर कोशिश में जुटे हैं।
धूप से फसलों पर विपरीत प्रभाव
यह भी देखने में आ रहा है कि लगातार धूप के कारण खरीफ फसलें मुरझा रही हैं, वहीं कीट व्याधि की शिकायत में इजाफा हो रहा है। बता दें कि क्षेत्र में करीब एक पखवाड़े से बारिश नही हुई है। केवल रविवार देर शाम को हल्की बारिश हुई है, जो फसलों के लिये नाकाफी बताई जा रही है। हालांकि , इसके दूसरे दिन सोमवार को दिनभर तीखी उमस का दौर रहा। जिससे लोग हलाकान नजर आए। गर्मी के उग्र तेवर देखकर लोग बारिश की संभावनाएं जता रहे थे।
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