जहां अपेक्षित ना हो वहां उपस्थित नहीं होना चाहिए –पंडित चंद्रशेखर शर्मा

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खण्डवा- गणेश गौशाला में चल रही भागवत कथा में शिव सती प्रसंग और राजा दक्ष की कथा के विषय का विस्तार करते हुए पंडित चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि जहां हमें आमंत्रित नहीं किया जाए वहां कभी नहीं जाना चाहिए अन्यथा हमें अपमान सहन का पड़ सकता है।  इसलिए आत्मसम्मान एवं स्वाभिमान को सर्वोपरि रखें, अभियान का त्याग करना चाहिए लेकिन स्वाभिमान को सदैव सर्वोपरी रखना चाहिए ।  कथा में परीक्षित द्वारा कलयुग का दमन, सुखदेव जी का आगमन, द्वारकाधीश विदुर प्रसंग, वराह अवतार, मनु वंश की कथा, कपिल देव का प्राकट्य और ध्रुव चारित्र का विस्तृत वर्णन करते हुए श्री शर्मा ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया ।  वृंदावन से आई हुई सांस्कृतिक मंडली ने मनोहारी प्रस्तुतियां दी और बड़ी संख्या में उपस्थित नगरजन का मन मोह लिया । तीसरे दिन प्रभु की कथा होगी जिसमें अजामिल की कथा, ऋषभदेव की कथा, दक्ष की कथा, प्रह्लाद चरित का वर्णन होगा ।

 कथा आरंभ में पँ. उमेश डोरवाल, रामचंद्र मौर्य, धर्मेंद्र बजाज, नरेश जांगिड़, कीर्ति अग्रवाल, समीक्षा दुबे, पिंकी राठौर, प्राची टुटेजा, अंतिम बाहेती, अरुण बाहेती, प्रकाश दशोरे नारायण बाहेती, राजीव शर्मा, डॉ दिलीप सोनी, रेणु अग्रवाल, प्रेरणा अग्रवाल द्वारा पंडित जी का स्वागत किया गया । संत चरण के रूप में नर्मदानंद जी का सानिध्य पूरी कथा में प्राप्त हुआ ।   कथा के तीसरे दिन  सामूहिक गोग्रास का आयोजन कथा के पश्चात किया जाएगा जिसमें गौ माता की आरती होगी ।  कथा संयोजक आशीष चटकेले, भूपेंद्र सिंह चौहान, मुख्य यजमान रितेश चौहान, मंगलेश तोमर, सर्वेश राठौर, मनोज पालीवाल, कैलाश पटेल, आशीष कपूर, अमित पालीवाल, लोकेश पचौरी, शिव तिवारी, मनीष अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण लोहार, प्रदीप शर्मा, कमल परदेसी, विजय लाड़सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे ।

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