अनोखा तीर, हरदा। स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय द्वारा व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयाम विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्घाटन संस्था की प्राचार्य ने व्यक्तित्व शब्द की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करते हुए किया। संस्था के प्रशासकीय अधिकारी वीके बिछोतिया ने व्यक्तित्व के बारे में बताया कि एक व्यक्ति जैसा इस संसार में दूसरा व्यक्ति खोजना असंभव है। शासकीय आदर्श महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर विजय अग्रवाल ने कहा कि आज व्यक्तित्व विकास रोजगार के लिए अति आवश्यक है। वेबीनार के मुख्य वक्ता के रूप में एमेनिटी विश्वविद्यालय मुंबई के एसोसिएट प्रोफेसर भानु सक्सेना जुड़े। जिन्होंने व्यक्तित्व के विभिन्न ऑब्जेक्टिव के संबंध में बताया, उन्होंने कहा कि यदि हम दिखावटी और बनावटी व्यक्तित्व बनाते हैं तो वह हमें क्षणिक सुख जरूर देता है किंतु भविष्य में अनेक अवसाद छोड़कर जाता है। दूसरे वक्ता के रूप में रामजस कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.राहुल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज हमें एक चरित्र निर्माण की आवश्यकता है और व्यक्तित्व निर्माण चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण में महती भूमिका निभा सकता है। जब तक व्यक्तित्व में सभी नागरिकों, प्रकृति और संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना नहीं विकसित होती है तब तक व्यक्तित्व अधूरा ही माना जाएगा। वेबीनार में भारत के लगभग 8 प्रदेशों से 108 से अधिक शोधार्थी जुड़े और विभिन्न शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र का वाचन किया। इस वेबीनार में महाविद्यालय की कला संकाय प्रभारी डॉ.धीरा शाह, डॉ.धर्मेंद्र कोरी, डॉ.हरिहर लभानिया, बसंतसिंह राजपूत, डॉ.सार्वेंद्र पटेल, कन्हैयालाल मालवीय, डॉ.प्रतिष्ठा कुमेकर आदि ने सक्रिय योगदान दिया। वेबीनार का सफल संचालन डॉ राकेश सिंह परस्ते ने किया।
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