किसान का आरोप ! दुकानदार ने थमाई नकली फंगीसाइट

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अनोखा तीर, हरदा। खरीफ सीजन में बोई गई फसलों को कीट से बचाने के लिये किसान महंगी दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, ताकि फसलों को रोग मुक्त रखा जा सके। किंतु इन सबके बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो किसानों के लिये सतर्कता का संकेत है। दरअसल, जिले के हंडिया तहसील क्षेत्र के ग्राम रिजगांव में रहने वाला मेहुल पटेल गुरूवार को किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ कृषि विभाग पहुंचा। यहां उपसंचालक एमपीएस चंद्रावत को एक शिकायती ओवदन सौंपते हुए कहा कि शहर के छिपानेर रोड़ स्थित गजानन कृषि सेवा केंद्र से खरीदा बीएसएफ कंपनी का फंगीसाइट प्रथम दृष्टया नकली दिखाई पड़ रहा है। मेहुल ने कहा कि संबंधित दुकान से 5-5 सौ एमएल की कुल 7 बॉटल खरीदी थी। इनमें से 2 बॉटल थोड़ी अलग होने की वजह से उनकी गुणवत्ता पर संदेह हुआ, तभी मेहुल ने ये मामला गांव के अन्य किसानों के साथ साझा किया। इसके बाद किसान प्रकोष्ट के प्रदेशाध्यक्ष केदार सिरोही, किसान कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सांई एवं प्रदेश उपाध्यक्ष दीपक सारण ने उपसंचालक कृषि श्री चन्द्रावत से मुलाकात की। वहीं किसान की व्यथा सुनाते हुए ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई की बात पर जोर दिया। इस मौके पर डीडीए श्री चन्द्रावत ने किसान तथा किसान संगठन के पदाधिकारियों को उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। साथ ही अधीनस्थ अमले को कार्रवाई के लिये पाबंद भी किया है। इस मौके पर किसान कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ करण जाट, जितेन्द्र सारण पिड़गांव एवं जीत जाट सहित अन्य किसान शामिल थे।

इस तरह की लापरवाही असहनीय  

इस पूरे मामले में कांग्रेस के किसान प्रकोष्ट प्रमुख केदार सिरोही ने कहा कि जिले में ऐसे मामले पहले भी उजागर हो चुके हैं। जो संबंधित विभाग के उदासीन रवैये को दर्शाता है। साथ ही उन लोगों के हौंसलें बुलंद करता है, जो अन्नदाताओं को अमानक सामग्री थमाने से जरा भी गुरेज नही करते हैं। जबकि यही किसान कड़ी मेहनत से अन्न उगाता है, वहीं देश का भंडार भरने में अपनी अहम भूमिका निभाता है। सिरोही ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराई।

दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई जरूरी

किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन सांई ने कहा कि बेखौफ होकर गुणवत्ताहीन दवाएं थमाई जा रही है। जिससे क्षेत्र के किसानों को आर्थिक चोट पहुंचना लाजमी है। साथ ही फसलों पर बुरा असर पड़ने की बात से इंकार नही कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि ऐसे मामलों में जांच उपरांत दोषियों के विरूद्ध नियम अंतर्गत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएं, तभी इस तराह की धड़ल्लेबाजी पर अंकुश लगेगा।

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