खरगोन- मप्र शासन द्वारा संतो के सानिध्य में स्नेह यात्राएं निकाली जा रही है। खरगोन में प्रारम्भ हुई यात्रा छठे दिन स्नेह यात्रा झिरन्या के मिटावल से आरंभ हुई। यात्रा के दौरान स्वामी हरिओम आनंद महाराज द्वारा समाज के वंचित लोगों के घरों में जाकर भेंट की गई। यात्रा के दौरान अनेक स्थानों पर बच्चें भी संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। गांवो में कन्याओं द्वारा सन्त समाज के साथ व स्वागत में कलश यात्राएं निकाली गई। बच्चों को भी संबोधित करते हुए स्वामी जी ने संस्कारों का महत्व बताया गया। संत हरिओम आंनद महाराज द्वारा माताओं से आग्रह करते हुए कहा कि अपने बच्चों को संस्कार अवश्य देवें। बच्चों तक संस्कार माता के द्वारा ही पहुंच सकते हैं। घर में और समाज में संस्कारों से ही प्रेम व स्नेह का वातावरण निर्मित होगा। स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज द्वारा रामायण के रचयिता वाल्मीकि जिनके नाम से वाल्मीकि समाज चल रहा है।
वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का पठन-पाठन हर जाति वर्ग समूह के लोग करते हैं। इसमें किसी प्रकार का कभी भी सनातन धर्म में जातिवाद छुआछूत रहा ही नहीं। उन्होंने कहा कि समय के कारण यह विकृति आई है परंतु हम सब एक परिवार की तरह एक दूसरे से समान व्यवहार करते रहे तो राष्ट्र को और अधिक मजबूत कर सकते हैं। स्वामी जी ने कहा कि भारत माता के हम सभी पुत्र हैं यह धरती किसी से बेर नहीं करती है। देश के प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा अद्भुत स्नेह यात्रा का कार्यक्रम आयोजित किया है जिससे सभी में स्नेह बंधुत्व की भावना और बढ़ेगी। यात्रा झिरन्या के भावसिंहपुरा में दोपहर खिचड़ी प्रसादी का वितरण हुआ। यात्रा सेल्दा होकर बमनाला से मोहम्मदपुर में समापन हुई। यात्रा के दौरान एकत्रित हुए समाज जनों के बीच गांव में संवाद कार्यक्रम आयोजित हुए।
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