अशुद्ध पेयजल, बीमारियों को आमंत्रण

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नितेश गोयल, हरदा। मानव की मूलभूत आवश्यकता शुद्ध जल ही होती है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है। नगरीय प्रशासन से लेकर प्रदेश एवं देश की सरकार की पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों को शुद्ध जल मुहैया कराने की भी होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक ग्रामवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजना चलाकर घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है। लेकिन हरदा के नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के मामले में हरदा नगर पालिका का शासन एवं प्रशासन पूरी तरह से फैल साबित हुआ है। कहने को तो नगर के अधिकांश घरों में नल जल के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जा रहा है, लेकिन नागरिकों को पहुंचाए जा रहे इस पेयजल के शुद्ध होने की कोई गारंटी नहीं है। हंडिया स्थित नर्मदा नदी से होने वाली इस पेयजल आपूर्ति के तहत हजारों घरों में पूर्ण रूप से दूषित पानी की ही सप्लाई नगरपालिका द्वारा की जा रही है। जल संवर्धन जैसी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय नगरीय प्रशासन ने प्रदेश एवं केंद्र सरकार से करोड़ों रुपए का बजट पास कराकर खर्च भी कर दिए हैं, लेकिन नगरवासियों को शुद्ध पेयजल नहीं नसीब हो पा रहा है। अनोखा तीर द्वारा जब नगर में हो रही इस दूषित पेयजल सप्लाई के संबंध में जानकारी प्राप्त की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए यदि नगरीय प्रशासन द्वारा नागरिकों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए इन कमियों को दूर नहीं किया गया तो, शहर की जनता जलजनित बीमारियों से परेशान होती रहेगी।

नहीं कर रहे फिल्टर प्लांट काम

नगर को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शहर से २२ किलोमीटर दूर नर्मदा नदी के किनारे फिल्टर प्लांट का निर्माण किया गया है। यहां स्थित दोनों ही फिल्टर प्लांट बदहाल स्थिति में हैं। फिल्टर यूनिट जो नर्मदा नदी के पानी को शुद्ध पेयजल में परिवर्तित करती है, वह सही तरीके से काम नहीं कर रही है। फिल्टर प्लांट पर न तो योग्य टेक्निशियन है और न ही पानी की शुद्धता की टेस्टिंग करने के लिए कोई उपकरण यहां पर उपलब्ध कराए गए हैं। फिटकरी की सिलाएं पटक कर बस अपने कर्तव्यों की इतिश्री करने का प्रयास किया जाता है। जिसके कारण पानी साफ ही नहीं होता। अशुद्ध पेयजल नगरवासियों को वितरित होने का एक कारण यह भी है कि हरदा नगरपालिका द्वारा पेयजल को शुद्ध करने के लिए जो फिल्टर प्लांट बनाया है, वह हंडिया में बनाया गया है, जो कि हरदा से २२ किलोमीटर दूर है। जबकि इस फिल्टर प्लांट की स्थापना नगर की सीमा में ही होनी चाहिए थी। २२ किलोमीटर दूर से जब फिल्टर होकर पानी लोहे के पाईपों एवं जगह जगह फूटी पाईप लाईन के माध्यम से हरदा आता है, तब तक वह शुद्ध पानी भी दूषित हो जाता है। विगत दिनों कांग्रेस द्वारा अशुद्ध पेयजल वितरण व्यवस्था को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया था। तब स्थानीय नगरीय निकाय द्वारा यह कहा गया था कि नेशनल हाईवे के कारण जगह-जगह पाईप लाईन फूट रही है, जिसके कारण पानी वितरण व्यवस्था में दिक्कत हो रही है। लेकिन शहर वासियों को शुद्ध पानी पिलाना एक तरह से यह नगरीय निकाय का सबसे बड़ा दायित्व है। इस मामले में नगरीय निकाय पूरी तरह फैल साबित हुआ है।

अशुद्ध जल से हो सकती है बीमारियां

इन दिनों जो नगरपालिका द्वारा नगर में पेयजल की सप्लाई हो रही है। उस जल में शुद्धता जैसी कोई चीज नहीं है। जिसके कारण नगरवासियों को जलजनित बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला चिकित्सालय एवं अन्य निजी चिकित्सकों से जब हमने इस संबंध में चर्चा की तो उन्होंने बताया कि पानी के दूषित होने के कारण चर्म रोग, पेट रोग, पीलिया, हैजा, उल्टी, दस्त एवं टाईफाईड के मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। इन सभी बीमारियों की मूल जड़ दूषित पानी होता है। बारिश के इस मौसम में नागरिकों को शुद्ध पेयजल की सबसे अधिक जरूरत होती है। डॉक्टरों ने कहा कि वर्तमान में जो नलों से पानी आ रहा है, उसे शुद्ध नहीं कहा जा सकता। नगरवासियों को चाहिए कि कभी भी नलों से आने वाले पानी को शुद्ध करने के लिए फिटकरी एवं क्लोरीन का उपयोग करके ही पेयजल के रूप में उपयोग करें। पानी को उबालकर ही पियें तो सबसे अच्छा इन बीमारियों से बचने का उपाय है।

करें उपभोक्ता फोरम में शिकायत : टांक

नगरीय निकाय को शुद्ध पेयजल के लिए हर माह जलकर के रूप में आप राशि देते हैं। तब आपके घरों में नगरपालिका पेयजल उपलब्ध कराती है। शुद्ध पेयजल पाना आपका अधिकार है। यदि आपको अशुद्ध और दूषित जल प्राप्त होता है तो आप इसकी शिकायत उपभोक्ता फोरम में कर सकते हैं। यह बात युवा अधिवक्ता यश प्रकाश टांक ने अनोखा तीर को कही। उन्होंने बताया कि यह एक तरह से सेवा में कमी है। यदि नगरपालिका दूषित जल का वितरण कर रही है तो आप उस जल को किसी बॉटल में मोहल्लेवासियों के सामने नल से एकत्रित करें, उसका पंचनामा बनाए और उस दूषित जल की जांच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में कराकर उसकी रिपोर्ट प्राप्त करें। श्री टांक ने कहा कि यह एक मानव स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मामला है। मैं इस मामले को उपभोक्ता फोरम में लेकर जाउंगा और जन समस्या से जुड़ा मामला होने के कारण मैं किसी भी शहरवासी का प्रकरण न्यायालय के सामने निशुल्क रूप से प्रस्तुत कर आपकी जन समस्या को दूर करने का पूरा प्रयास करूंगा। श्री टांक ने कहा कि जनहितैषी किसी भी मामले में मेरे द्वार सदैव खुले हैं। आप निश्चिंत होकर अपने हक की लड़ाई मेें मुझे भागीदार बनाएं।

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