रक्षाबंधन का पर्व ! भाई और बहन को स्नेह और विश्वास की डोर से बांधता है। इस बीच त्यौहार में ओर अधिक आत्मीयता घुल जाती है, जब भाई और बहन एक-दूसरे के लिये कोई विशेष तैयारियां करते हैं। ऐसे वक्त पर विश्वास का ये बंधन ओर मजबूत होना लाजमी है। इसी क्रम में हरदा की बेटी रिषिका हर साल रक्षाबंधन से पहल भाईयों की कलाई पर बांधने के लिये अपने हाथों से रक्षासूत्र तैयार करती आ रही है। ये सिलसिला करीब 12 साल से जारी है। जिसका एक अलग ही महत्व एवं आनंद है।
रितेश त्यागी, हरदा। भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व करीब आ गया है। इसी के साथ त्यौहार की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। इस बीच हम आपके लिए एक ऐसी खबर लाएं हैं, जो स्नेह और विश्वास के इस पर्व पर लगन एवं लगाव का संदेश देती हैं। साथ ही भाई-बहन के आपसी प्रेम से जुड़े इस खास मौके पर भाईयों के प्रति बहनों की आत्मीयता त्यौहार पर खुशियों को दोगुना कर देता है। कुछ इसी तरह शहर के गोलापुरा में रहने वाली कॉलेज की छात्रा रिषिका शर्मा हर साल रक्षाबंधन को यादगार बनाने से पीछे नही रहती हैं। रिषिका भाईयों की कलाई पर बांधने के लिये खुद अपने हाथों से रक्षासूत्र तैयार करती हैं। इसके लिये रिषिका करीब एक महिने पहले से राखी की बुनाई शुरू कर देती हैं, जो त्यौहार तक निर्धारित संख्या में राखियों को मूर्तरूप दे देती हैं। इसके पीछे रिषिका का कहना है कि बाजार में मनपसंद राखी नही मिल पाती हैं। जिसके चलते कहीं ना कहीं एक कमी सी खलती थी। इसे ध्यान में रखकर स्वयं राखी तैयार करने का मन बनाया और प्रयास शुरू कर दिया। अब हर साल घर पर ही हाथों से राखी तैयार करते हैं।
प्रयासों को मिली सफलता
उन्होंनें बताया कि इसकी शुरूआत दौरान कठिन स्टेप को समझने में थोड़ा समय लगा। लेकिन धीरे-धीरे सबकुछ सरल होता चला गया, अब कुछ घंटो की मेहनत में सुंदर एवं सबसे अलग राखी तैयार कर सकते हैं। वे अपनी अन्य सहेलियों को भी इसके प्रति प्रेरित कर चुकी हैं। जो हर साल रक्षाबंधन से मनपसंद राखी बनाती हैं।
रंग-बिरंगी सुंदर राखियां
बता दें कि सुश्री रिषिका द्वारा अपने हाथों से तैयार राखियों को हर साल सराहना मिलती है। विश्वास की डोर रक्षासूत्र की सभी भाई प्रशंसा करते हैं। इसकी मुख्य वजह हस्तनिर्मित राखियों में मजबूत एवं आकर्षक धागा इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें अलग-अलग डीजाईन भी गढ़ी जाती हैं, जो राखी ओर अधिक सुंदरता प्रदान करता है।
भाई-बहन को चित्रकला से खास लगाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉलेज में अध्ययनरत रिषिका एवं उसका बड़ा भाई ऋषभ दोनों पढ़ाई के साथ-साथ चित्रकला में विशेष रूचि रखते हैं। उत्तरप्रदेश के अयोध्या में वर्ष 2021 में युवा आर्टिस्ट सतीष गुर्जर एंड टीम ने अनाज से विश्व की सबसे बड़ी श्रीराम दरबार की आकृति को आकार दिया था। जो देशभर में खासी चर्चा का विषय रहा था। साथ ही 12 जनवरी 2020 को युवा उत्सव अंतर्गत मुख्यालय पर 60 सदस्यीय टीम ने 52 क्विंटल अनाज से स्वामी विवेकानंद की विशाल कलाकृति को मूर्तरूप दिया था। उस टीम में भी रिषिका और ऋषभ दोनों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी तरह मुख्यालय स्थित नेहरू स्टेडियम पर महिला दिवस के उपलक्ष्य में सैकड़ों महिलाओं के सहयोग से महामहिम राष्ट्रपति द्रोपती मूर्मू की विशाल छवि तैयार की थी। इसमें भी दोनों भाई-बहन ने अपना सक्रिय योगदान दिया था।
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