अनोखा तीर हरदा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की संभावित घोषणा देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। विभाग के पास इतना बजट है कि रक्षाबंधन पर बढ़ने वाली राशि 250 रुपए मिलाकर कुल 1250 रुपए सभी बहनों को मिल सकेंगे। अभी 1.26 करोड़ से अधिक बहनों को 1260 करोड़ रुपए से ज्यादा दिया जा रहा है। इस साल विभाग को 12 हजार करोड़ की राशि अतिरिक्त दी गई है। शिवराज महिलाओं से कहते है कि अब हर महीने राशि डालता जाऊंगा। रक्षाबंधन 30 अगस्त को है। प्रदेश की 1.26 करोड़ बहनों के खाते में 1,000 डाले जा रहे हैं, सीएम कह चुके हैं कि ये राशि बढ़ाकर 3000 कर दूंगा। बता दें हर साल सरकार पर 18 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा।
चुनावी साल में महिलाओं पर फोकस
विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस लाड़ली बहना योजना पर है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर जिले में लाडली बहना योजना का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। इस बीच 5 अगस्त को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा करते हुए कहा कि रक्षाबंधन के दो दिन पहले यानी 28 अगस्त को प्रदेश की सभी बहनों से वर्चुअल संवाद करेंगे। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क्या बहनों को फिर से बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सीएम लाडली बहना योजना की राशि में वृद्धि करने की घोषणा करते हुए राशि 1250 रूपए कर सकते हैं। हालांकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लाडली बहना योजना के अंतर्गत अभी पात्र महिलाओं को मप्र सरकार हर महीने की 10 तारीख को खातों में पैसे ट्रांसफर करती है। इस योजना की राशि को सीएम ने चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 3000 रुपए करने की घोषणा की है। सीएम ने बताया है कि किस तरह से इस योजना की राशि में वृद्धि की जाएगी। अब माना जा रहा है कि रक्षा बंधन के दो दिन पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की सभी पात्र बहनों का राखी का तोहफा दे सकते हैं।
पात्रता नियम में किया था बदलाव
हाल ही में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना की पात्रता नियम में भी बदलाव किया था। इस बदलाव के बाद 21 साल से उम्र की महिलाएं इस योजना के लिए पत्र होंगी। इसके साथ ही जिन महिलाओं के पास ट्रैक्टर है वो महिलाएं भी इसके लिए 20 अगस्त तक अप्लाई कर सकती हैं। पहले 23 साल तक की महिलाओं को इस योजना के लिए पात्र माना गया था। बता दें कि प्रदेश में 1 करोड़ से ज्यादा महिलाओं का रजिस्ट्रेशन लाड़ली बहना योजना के लिए किया गया है।
गेम चेंजर बनी योजना
लाड़ली बहना योजना को मप्र में नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। सीएम ने इसी साल 28 जनवरी को नर्मदा जयंती के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी। योजना में जून से 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के खाते में प्रतिमाह 10 तारीख को एक हजार रुपए ट्रांसफर किए जा रहे हैं। सीएम ने 10 जून को जबलपुर में योजना की पहली किस्त जारी करते समय आगामी समय में राशि को 1000 रुपए से बढाकर क्रमश: 1250 रुपए, 1500, 1750, 2 हजार, 2250, 2500, 2750 रुपए करते हुए 3 हजार रुपए करने की बात कही थी। सीएम हर बार योजना की राशि बढ़ाकर 3 हजार रुपए करने की बात दोहराते हैं। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले योजना की राशि बढ़ाया जाना तय है। चूंकि अक्टूबर की शुरूआत में विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में सितंबर में राशि बढ़ाने की घोषणा में कानूनी पेंच आ सकता है। चूंकि मुख्यमंत्री लगातार खुद को 1.25 करोड़ बहनों के भाई के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, इसलिए वे रक्षाबंधन से पहले महिलाओं से संवाद के दौरान योजना की राशि बढ़ाने की घोषणा कर सकते हैं। अभी योजना में 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में हर महीने करीब 1250 करोड़ रुपए जमा किए जा रहे हैं। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री मनीष रस्तोगी का कहना है कि 26 अगस्त को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की लाभार्थियों से संवाद करेंगे।
1250 रुपए हो सकती है राशि
सूत्रों के अनुसार, लाड़ली बहना योजना की राशि में 250 रुपए की वृद्धि की जा सकती है। जिसके बाद प्रत्येक पात्र महिला के खाते में 1250 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। वित्त विभाग को इस संबंध में निर्देश भी जारी किए गए हैं। फिलहाल बढ़ी हुई कब से मिलेगी इसके बारे में खुलासा नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले 1250 रुपए महिलाओं के खाते में डालने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।
अविवाहित बहनों में नाराजी
सीएम शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जहां प्रदेश के महिला जगत में हर्ष है। वहीं अनेक महिलाएं ऐसी भी हैं जो इससे खासी नाराज हैं। इनमें उन महिलाओं की तादाद बहुत बड़ी है जो अविवाहित होने के कारण इसके लाभ से वंचित हैं। बता दें अनेक महिलाएं अपरिहार्य कारणों से विवाह न होने के कारण दूसरे परिजनों पर आश्रित हैं। इन्हें अपने माता-पिता और भाईयों-बहनों से भी गुजर-बसर में कोई मदद नहीं है। इधर शासन की इस योजना में भी उनके साथ भेदभाव किया गया है। जबकि जीवन के गुजारे में मदद की उन्हें ज्यादा जरूरत हैं।

