शहर के मध्य में स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस नया बस स्टैंड से इन्दौर, खंडवा और बैतूल समेत कुल पांच बड़े रूट तथा छीपानेर, मगरधा और सिराली समेत कुल पांच छोटे रूटों पर करीब डेढ़ सौ बसों का संचालन जारी है। लेकिन इन सबके बीच नियमों के पालन की पड़ताल तथा शहरी क्षेत्र में बसों की रफ्तार को लेकर कोई अभियान नही छेड़ा जाता है। ऐसे में बस स्टॉप की मनमानी बढ़ना लाजमी है। यही वजह है कि शहरी क्षेत्र में भी बस की रफ्तार कम नही होती है, जो कहीं ना कहीं किसी अप्रिय हादसे का संकेत प्रतीत होता है।
अनोखा तीर, हरदा। यात्री बसों के परमिट में दर्ज समय-सारणी के अनुसार उन्हें एक स्टॉप से दूसरे स्टॉप पर पहुंचना होता है। इन परिस्तिथियों के बीच कई बसें अंधी रफ्तार में दौड़ती हैं। परंतु उनकी यही रफ्तार शहरी सीमा में किसी अप्रिय हादसों का संकेत देती है। बावजूद ऐसे चालकों पर प्रभावी कार्रवाई ना होना किसी बड़ी लापरवाही से कम नही है। ऐसा इसलिये, क्योंकि शहरी क्षेत्र में जहां दिनभर चहलपहल रहती है, वहीं बसों के उन रूटों पर ट्राफिक कंट्रोल के पर्याप्त इंतजाम तक नही हैं। जिसके चलते शहर के इन्दौर रोड, खंडवा बायपास और छीपानेर रोड पर अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। इसमें इन्दौर रोड स्थित सांई मंदिर से लेकर नई सब्जी मंडी स्थित स्टेट बैंक तिराहे तक बुरा हाल रहता है। इसी बीच शासकीय कॉलज सहित अन्य शिक्षण संस्थाएं हैं। जहां दिनभर छात्र-छात्राओं की आवाजाही रहती है। इन सबको लेकर जागरूक नागरिकों का कहना है कि तेज रफ्तार बस के चालकों को सख्त हिदायत के साथ-साथ अतिसंवेदनशील पाइंट चिन्हित किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है, तभी शहर की यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार की पहल हो सकेगी।
ट्राफिक सिग्नल का नही हुआ सुधार
बता दें कि शहर के ट्राफिक कंट्रोल की दिशा में कुछ साल पहले यातायात पुलिस एवं नगर पालिका ने आपसी समन्वय स्थापित कर शहर के प्रमुख चौराहें पर सिग् नल लगाने का प्लान बनाया और फिर उसे मूर्तरूप भी दिया था। इसके बाद ट्राफिक व्यवस्था में सुधार भी देखने को मिला। लेकिन कुछ ही समय में व्यवस्था पटरी से उतरना शुरू हुई, जो धीरे-धीरे पूरी तरह बंद हो गई। कई दिनों तक ट्राफिक सिग्नल शोपीस की तरह खड़े रहे। वहीं बाद में एक-एक करके जमींदोश होने लगे। स्थिति यह है कि कई सिग्नल टूटे की टूटे पड़े हैं।
पांचों रूट पर डेढ़ सौ से ज्यादा बसें
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यालय से इन्दौर, खंडवा, बैतूल, होश्ंागाबाद और भोपाल के अलावा अन्य छोटे रूटों पर करीब डेढ़ सौ से ज्यादा बसों का संचालन जारी है। इनमें सर्वाधिक बसें इन्दौर रूट तथा खंडवा-होश्ंागाबाद रूट पर चलती हैं। इन्हीं बसों में कई बसें ऐसी भी हैं, जिन्हें सीमित समय में अगले स्टॉप पर पहुंचना होता है। यही वजह है कि बसों को तेज रफ्तार अपनाना पड़ता है। यहां तक की नियमों को दरकिनार करने से भी नही चूकते हैं। एक यात्री ने यहां तक कहा कि समय के चक्कर में सवारी को उतारते समय भी जल्दबाजी करते हैं।
त्यौहार नजदीक ! शुरू होगी मनमानी
यहां बताना होगा कि इसी महिने में रक्षाबंधन-भुजरिया समेत अन्य त्यौहार आने वाले है। ऐसे वक्त पर बसे फुल चलती हैं। बस यहीं मौके का फायदा उठाने से बस ऑपरेटर जरा भी नही चूकते हैं। ऐसे समय पर जहां सवारियों से ज्यादा किराया वूसल किया जाता है, वहीं तीन टिकिट पर केवल दो सीट मुहैया कराई जाती हैं। इसका विरोध करने पर बस का स्टॉप सवारी को उतारने के लिये तैयार रहता है। मजबूरन यात्रियों को उनकी मनमानी सहन करना पड़ता है। बता दें कि बस स्टॉप की इस तरह की मनमानी के खिलाफ पिछले साल जहां यात्रियों ने मोर्चा खोल दिया था, वहीं मीडिया के माध्यम से भी उनकी मनमानी उजागर हुई थी। जिस पर तत्कालीन जिला परिवहन अधिकारी ने संज्ञान लेते हुए बसों की सघन जांच की थी। इस दौरान यात्रियों से किराये के संबंध में जानकारी हासिल किए जाने से बस का संचालन करने वालों के बीच हड़कंप देखने को मिला था। देखना होगा कि परिवहन एवं यातायात विभाग फिर इस बार कसावट करता है या नही ?
फेक्ट फाइल ….
बड़े रूट — इन्दौर, खंडवा, भोपाल, होशंगाबाद, बैतूल और सिहोर
छोटे रूट — छीपानरे, रहटगांव, मगरधा, सिराली, और शिवपुर
कुल बसें — करीब 155
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