
– अजात शत्रु
(लेखक देश के प्रसिद्ध साहित्यकार और फिल्म समीक्षक है)
शिवराज मध्यप्रदेश को मंदिर और प्रदेशवासियों को देवता की संज्ञा देते हुए खुद को पुजारी बताते है। शायद इसलिए उन्होंने स्वयं अमृतपान के बजाए इस प्रदेश पर अमृत वर्षा को महत्व दिया है। दूसरों की भावनाओं, कष्टों को महसूस करते हुए जो मुख्यमंत्री खुद रो दें वास्तव में वह ममतत्व ह्रदय वाला ही हो सकता है। राज्य की राजनीति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचते हुए नित्य अपनी सफलता की कहानियां रचने वाले शिवराज सिंह ने अपने कर्म से सिद्ध कर दिया है कि वह किसान के बेटे है और गांव व गरीब की पीड़ा को खुद महसूस करते है। वह एक सामान्य से नजर आने वाले व्यक्ति के प्रतिनिधि की तरह इतने सहज, सरल और बिंदास है कि अपनी बात लोगों के दिलों तक पहुंचा सकते है। यही कारण है कि वर्षों से वह जनता के दिलों पर राज करते आए और करते रहेंगे।
मध्यप्रदेश मेरी जन्मस्थली है, चाहे मैं मुम्बई उल्लास नगर में रहता हूं, लेकिन हरदम मध्यप्रदेश के गांव, खेत, खलिहान मेरे जहन में समाए रहते है। प्रहलाद ने अपने अखबार अनोखा तीर के लिए और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए पहले भी मुझसे कुछ न कुछ लिखवाया है। ८२ साल की उम्र में आज मुझे न तो सरकार से और न मुख्यमंत्री से कुछ चाहिए, हां चाहिए मेरे मध्यप्रदेश के लिए विकास और विकास। अस्वस्थ्यता के कारण अब कुछ लिख नहीं पाता हूं। लेकिन प्रहलाद कहां मानने वाला हैं। आज जब मैं उल्लास नगर स्थित अपने घर की बालकनी में बैठकर उसके कहे अनुसार मुख्यमंत्री पर लिखने की सोचने लगा तो कुछ अलग ही दृश्य नजर आया। मैं कभी प्रत्यक्ष रुप से शिवराज सिंह चौहान से नहीं मिला हूं। लेकिन आज जब मैनें देखा तो जो आकृति उभरकर आई वह आत्मविश्वास और आत्मविकास के साथ राज्य की तरक्की और आम व्यक्ति की सुख शांति के लिए एकाग्रता, चिंतन, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ जुटा हुआ जिद्दी और अपनी धुन के पक्के व्यक्ति शिवराज सिंह चौहान की थी। बेशक मैं मध्यप्रदेश को उसके गठन से पहले और गठन के बाद भी देखता आया हूं। २० साल पहले भी देखा था। पिछले २० वर्षों में भी कई बार देखा। इतनी तेजी से तो तोहफा फिल्म में श्रीदेवी ने भी अपनी पोशाक परिवर्तन नहीं की थी जितनी तेजी से मध्यप्रदेश के हालात बदले है।
मेरे गांव पलासनेर की ही बात करूं तो कच्चा गोया हुआ करता था। बरसात में कीचड़ सना और गर्मी में धूल उड़ाता वह गोया आज पक्की चमचमाती सड़क है। यह केवल अकेले मेरे गांव में ही नहीं बनी बल्कि मध्यप्रदेश के लगभग सभी गांवों में ऐसी सड़कें अब आम हो गई है। पहले जब गांव आता था तो लालटेन और उसके लिए केरोसीन की व्यवस्था पहली फुर्सत में करनी पड़ती थी। अब शायद वह लालटेन या तो कहीं कबाड़े में पड़ी होगी या हो सकता है कबाड़े वाले को दे दी हो। उसकी आवश्यकता अब नहीं पड़ती। बिजली जो २४ घंटे रहने लगी है। यह सब कैसे हुआ? पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ था? जब इस पर विचार किया तो एक ही बात उभरकर आई कि मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह हो गया है। वैसे वह शिवराज सिंह जो पुरुष की काया में भी मां ह्रदय लिए हुए है, ममतत्व भरा ह्रदय है। राष्ट्र कवि प्रदीप ने अपने एक गीत में महात्मा गांधी के लिए लिखा था- अमृत दिया सभी को मगर खुद जहर पीया। आज अगर मैं यह कहूं कि समुद्र मंथन के समय देवताओं को अमृत सौंपकर शिव ने जो विष पीया था वही कार्य मध्यप्रदेश के शिव अर्थात् शिवराज ने किया है। अक्सर पढ़ता सुनता रहता हूं कि शिवराज मध्यप्रदेश को मंदिर और प्रदेशवासियों को देवता की संज्ञा देते हुए खुद को पुजारी बताते है। शायद इसलिए उन्होंने स्वयं अमृतपान के बजाए इस प्रदेश पर अमृत वर्षा को महत्व दिया है। दूसरों की भावनाओं, कष्टों को महसूस करते हुए जो मुख्यमंत्री खुद रो दें वास्तव में वह ममतत्व ह्रदय वाला ही हो सकता है। राज्य की राजनीति के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचते हुए नित्य अपनी सफलता की कहानियां रचने वाले शिवराज सिंह ने अपने कर्म से सिद्ध कर दिया है कि वह किसान के बेटे है और गांव व गरीब की पीड़ा को खुद महसूस करते है। वह एक सामान्य से नजर आने वाले व्यक्ति के प्रतिनिधि की तरह इतने सहज, सरल और बिंदास है कि अपनी बात लोगों के दिलों तक पहुंचा सकते है। यही कारण है कि वर्षों से वह जनता के दिलों पर राज करते आए और करते रहेंगे। चूंकि काम ही उनके लिए खाने पीने जैसा है।
ऐसे लोग काम में डूबकर खाने का समय भी भूल जाते है। कुछ लोग काम के बाद आराम करते है, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि शिवराज के लिए काम ही आराम है। हो सकता है आपको लगे की जीवन भर तीखे व्यंग्य और खरी-खरी बातें लिखने वाला यह अजात शत्रु आज शिवराज के कसिदे कैसे गढ़ने लगा। लेकिन हां मैं हर उस व्यक्ति के कसिदे गढ़ सकता हूं जो मेरे मध्यप्रदेश के लिए और मेरे प्रदेश की जनता के लिए समर्पित होकर विकास करेगा। मुझे किसी दल से कोई सरोकार नहीं है। मैं हर उस दल में हूं जो दिल से विकास करें। जनता के लिए स्वयं को समर्पित करने वाले मध्यप्रदेश के ऐसे जननेता को मैं अपना शुभाशीष देता हूं। उम्मीद करता हूं कि मेरे जीवन के अंतिम पड़ाव तक मैं प्रदेश के विकास की वह तस्वीर देखूं जो मुझे शायद इस नश्वर शरीर के बाद स्वर्ग में भी देखने को न मिले।
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