स्वयं को भगवान के अर्पण कर दें तर्पण से पहले : पंडित सुशील जोशी

अनोखा तीर, हरदा। गुर्जर छात्रावास में चल रही श्रीमद्भागवत के तृतीय दिवस की कथा में पंडित सुशील जोशी जी ने बताया कि हमारा तर्पण नहीं हो उससे पहले स्वयं को भगवान के अर्पण कर देना चाहिए। बाद में तो कई प्रकार की परेशानियां हैं। मनुष्य से ज्यादा भगवान को दूसरी कोई वस्तु प्रिय नहीं है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा तुलसीदास जी ने लिखा है। सब मम प्रिय सब मम उपजाये। सबसे अधिक मनुज मोही भाये। भगवान को न धन प्रिय है ना कोई और वस्तु। आज की दौड़ धूप में मनुष्य भगवान से दूर होता जा रहा है और अपने आप को बड़ा सुखी मान रहा है। कर्दम ऋषि के प्रसंग में गृहस्थ आश्रम के बारे में बताया। कर्दम जी ने गृहस्थी में रहकर भगवान को प्राप्त कर लिया। चारों आश्रमों में गृहस्थ आश्रम सबसे श्रेष्ठ है। परिवार हो या व्यवहार हो कपट रूपी खटाई पढ़ने से दोनों टूट जाते हैं। आज कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनेगा।

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