आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह मुख्यालय स्थित शासकीय जिला अस्पताल के शौचालय का हाल है, जो पूरी तरह गंदगी से जकड़ा हुआ है। शौैचायल की दुर्दशा देखकर लोग सीधे बाहर का रूख करना बेहतर समझते हैं। खासकर महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल के पुराने शौचालय जो कि अस्पताल चौकी के पास हैं। यहां महिला और पुरूषों के लिये अलग-अलग शौचालय बने हैं। लेकिन इनकी हालत किसी से छिपी नही है। जिसकी मुख्य वजह नियमित साफ-सफाई का अभाव बताया जा रहा है। जिसके चलते शौचायल की तस्वीर तक बदल गई है। इतना ही नही, शौचालय में गुटखा खाकर थूकना और उसकी पन्नी वहीं पर फेंक देने के अलावा नशे के लिये इस्तेमाल की जाने वाली सायरप की खाली बोतलें यहां-वहां बिखरी पड़ी रहती हैं। यही हाल अस्पताल की अन्य सुनसान जगह, गैलरी एवं कोनो में भी दिखेगा। जहां आते-जाते समय लोग मौका पाकर थूकना एवं कचरा फेंकने से बाज नही आते हैं। जिसका खामियाजा आम व्यक्ति को भुगतना पड़ता है। खैर, ये सब प्रशासन की निगरानी तथा अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी का मामला है। लेकिन इन सबके बीच यह भी सच है कि यहां व्याप्त गंदगी को देखकर लोग कह ही देते हैं, कि यह बात गलत है।

