गणेश पांडे, भोपाल। पालपुर नेशनल पार्क में धात्री चीता की मौत के बाद प्रबंधन टीम का ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, क्योंकि खुले में विचरण कर रही निरवा को पकड़ने में अब तक फॉरेस्ट अफसर असफल रहें हैं। निरवा को पकड़ने के लिए प्रबंधन टीम ड्रोन और कैमरा ट्रैप के अलावा केज का भी इस्तेमाल कर रही है, जबकि 10 दिन से अधिक का समय बीत गया है। पार्क के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निरवा चीता की खोज में वन विभाग की 60 सदस्य चार टीमें लगी हैं। इसके अलावा 5-5 सदस्य वाली दो ड्रोन टीमें, कैमरा ट्रैप और डब्लूआईआई की दो टीमों सहित कुल 100 लोग कूनो के जंगलों की खाक छान रहें है, फिर भी निरवा को पकड़ने में असफल हैं। सूत्रों ने बताया कि निरवा का रेडियो कॉलर 16 जुलाई से पहले ही काम करना बंद कर दिया था। इस पर तत्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ जेएस चौहान ने पार्क डायरेक्टर और डीएफओ को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सेटेलाइट बीएचएफ सिग्नल की टाइमिंग कम कर दी जाए। दो-दो घंटे की टाइमिंग को कम कर पांच 5 मिनट का अंतर कर दिया जाए। ऐसा करने पर निरवा की निगरानी के साथ-साथ उसे जल्द ही कैप्चर कर उसका रेडियो कॉलर बदल दें। बताया जाता है कि चौहान के निर्देशों को अनसुना कर दिया गया और 21 जुलाई से सेटेलाइट बीएचएफ का सिग्नल भी आना बंद हो गया। तब से अब तक निरवा के पगमार्क दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, किन्तु उस तक पहुंचने में पार्क प्रबंधन की टीम असफल हो रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि चीता की निगरानी में हो रही लापरवाही को लेकर भी पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एससीएस वन जेएन कंसोटिया को पत्र लिख चुके हैं। इस पत्र को मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया।
इनका कहना है…
निरवा का पगमार्क ससईपुरा में दिखाई दिया है। उस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन, कैमरा ट्रैप और कैज लगाए गए हैं।
पीके वर्मा, डीएफओ कूनो नेशनल पार्क
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