अनोखा तीर, हरदा। गुर्जर छात्रावास हरदा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रथम दिन पंडित जोशी ने जीवन में भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि संसार में आने के बाद हम अनेक रंगों से मोहित होते हैं। चाहे मकान का रंग हो चाहे गाड़ी का हो, चाहे कपड़ों का रंग हो। हम उन रंगो की और आकर्षित होते हैं। यह मनुष्य स्वभाव है। हम संसार के रंगों में खूब रंगाए, लेकिन महत्व की बात यह है कि सारे रंग हो और भक्ति का रंग नहीं है तो सारे रंग व्यर्थ है फीके है। कोशिश यह होनी चाहिए कि सारे रंग हो। लेकिन साथ में भक्ति का रंग भी हो। भगवान से प्रार्थना करना कि प्रभु यहां कोई रंग में कमी हो भी जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन भक्ति के रंग में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। जैसे ध्रुव, प्रहलाद, मीरा गोपियों को रंगा वैस ही हमको भी रंग देना। आत्मदेव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आत्मदेव के पास सब था पत्नी-पुत्र परिवार पैसा लेकिन भक्ति नहीं थी। बिना भक्ति के भटक गए थे। जब संत मिले तब भक्ति का संचार हुआ। तब कल्याण हुआ।
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