अनोखा तीर, हरदा। अभी मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव आगामी वर्ष जनवरी माह के पहले सप्ताह में होने वाले हैं। मगर चुनाव के छह माह पहले ही चुनावी तपिश में तपने लगा है। बीते दो महीनों से प्रमुख राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के दौरे शुरू हो गए हैं। कर्नाटक और हिमाचल चुनाव के बाद अब कोई भी पार्टी मध्यप्रदेश एवं राजस्थान जैसे दो बड़े राज्यों को हल्के में नहीं लेना चाह रही है। यही वजह है कि इसी माह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरों पश्चात अब राजधानी भोपाल मेंप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक रोड होने जा रहा है। इसके पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोदी भोपाल में वंदे मातरम एक्सप्रेस को झंडी दिखाने के कार्यक्रम में आ चुके हैं। जाहिर है अब भोपाल में उनके रोड-शो पश्चात यह प्रदेश चुनावी रंग में रंगा जाएगा। इधर कांग्रेस पार्टी भी आरपार की लड़ाई लड़ने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र आजमा रही है। इसमें पार्टी के स्टार लीडर राहुल गाँधी भी एक आमसभा को संबोधित करने मध्यप्रदेश के दौरे पर आने वाले हैं। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय नेत्री प्रियंका गांधी भी जबलपुर और ग्वालियर में दो बड़ी आमसभाएं ले चुकी हैं। सब कुछ ठीकठाक रहा तो मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में एक-दो स्थानों पर पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को भी लाया जा सकता है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज चौहान हर बेल्ट में मोर्चा संभाले हुए हैं। बहरहाल इस सबके बीच प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से कौन-कहां मोर्चा संभालेगा, किसे टिकिट मिलेगी, अभी ऐसे अनेक सवाल अनुत्तरित होने से मैदान क्षेत्र में वह गर्मी नजर नहीं आ रही। हालांकि विगत दिनों हरदा प्रवास दौरान पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के खास एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने यह साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी कुछ कमजोर सीटों पर काफी पहले अपने प्रत्याशी मैदान में उतारकर उन्हें संपूर्ण क्षेत्र में संपर्क करने का पूरा मौका प्रदान करेगी। ऐसी स्थिति में मुमकिन है कि हरदा जिले में भी पार्टी द्वारा अपने संभावित उम्मीदवारों को सामने लाया जा सकता है। इस दृष्टि से देखा जाए तो पार्टी का यह दाव ठीक रहेगा। क्योंकि गुटों में बंटी रहने वाली पार्टी को अपने भीतर आपसी सामंजस्य बैठाने का पूरा मौका मिल सकता है। यह इसलिए भी ठीक रहेगा क्योंकि आदिवासी बेल्ट में जोर आजमाने एक नई युवा शक्ति जयस का उदय हो गया है। इस नए दल ने तो अभी से अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर ट्रायबल बेल्ट में लक्ष्मण रेखा खींचने की मुहिम शुरू कर दी है। अत: प्रदेश में ऐसे ट्रायबल बहुल अन्य क्षेत्रों में भी हालात बनाने के लिए अन्य राष्ट्रीय पार्टियों को भी अपने उम्मीदवारों का ऐलान काफी पहले करना मुफीद रहेगा। अन्यथा बनती तस्वीर बिगड़ने का खतरा भी है। ध्यान रहे गत विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका ऐसी सीटों ने ही निभाई है। जहां जीतहार के मामूली अंतर ने बड़ा खेल कर दिया था।

