इलेक्ट्रॉनिक कॉलर लगाना मूर्खतापूर्ण : सुब्रण्यम स्वामी

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गणेश पांडे, भोपाल। कूनो नेशनल पार्क में कॉलर आईडी लगाने से फैले संक्रमण के कारण चीता की मौत के बाद सोशल मीडिया पर डिबेट छिड़ गया है। इस डिबेट में भाजपा के फायरब्रांड नेता एवं वरिष्ठ सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी कूद पड़े हैं। सांसद स्वामी ने ट्वीट कर भारत में चीता को इलेक्ट्रॉनिक कॉलर लगाने को मूर्खतापूर्ण बताया है। बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्वीट में चीता टास्क फोर्स के अध्यक्ष राजेश गोपाल के वक्तव्य को कोड करते हुए लिखा है कि आर्द्र और बरसाती भारतीय क्षेत्र में चीते पर इलेक्ट्रॉनिक कॉलर लगाना कितना मूर्खतापूर्ण है, जबकि यह प्रजाति अफ्रीकी मौसम में गर्म और शुष्क मौसम में विकसित हुई थी। अब आधे आयातित चीता मर चुके हैं। न तो मैं इलेक्ट्रॉनिक कॉलर पर आपत्ति कर रहा हूं, बल्कि आर्द्र और बरसाती जलवायु में चीता की गर्दन पर बिना सोचे-समझे इस्तेमाल पर आपत्ति जता रहा हूं। उनके ट्वीट के जवाब में रघु काड ने ट्वीट किया है कि सर, ऐसा लगता है कि यह कारण छिपा हुआ है! प्रथम स्थानांतरण के बाद निदेशक को परियोजना से हटा दिया गया। इसी प्रकार एक और ट्विटर नारायण विश्वम ने स्वामी के ट्वीट के समर्थन में ट्वीट करते हुए लिखा है कि डॉक्टर स्वामी हमेशा तथ्यों की पुष्टि करते हैं और किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करने से पहले विशेषज्ञों से परामर्श करते हैं। हममें से अधिकांश लोगों की तरह कभी भी लापरवाही से कुछ भी नहीं कहेंगे।

विशेषज्ञों ने वन विभाग की निगरानी पर सवाल उठाए

सतही निगरानी हो रही है। पशु चिकित्सकों को केवल तभी सूचित किया जा रहा है जब चीते खराब स्वास्थ्य स्थिति में पाए जाते हैं। परियोजना से जुड़े एक शोधकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कोई दैनिक जांच नहीं हो रही है। उन्होंने इसे गंभीर चूक बताते हुए कहा कि पहले विभाग ने मौत को क्षेत्रीय लड़ाई के परिणाम दिखाने की कोशिश की थी।

कूनो में प्रे-बेस बढ़ाना होगा

वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी रामगोपाल सोनी का कहना है कि यदि चीतों की बसाहट सफल करनी है तो प्रे-बेस बढ़ाना ही होगा। जितना क्षेत्र दिया है वो 20 चीतों के लिए पर्याप्त है, क्योंकि चीते समूह में शिकार करते है। इसलिए एक चीते को 100 वर्ग किलोमीटर चाहिए कि अवधारणा गलत है। 100 वर्ग किलोमीटर में यदि प्रे-बेस सघन हो तो 10 चीते आराम से रह सकते है। तो अभी कूनो और गांधी सागर को सही प्रबंधन से तैयार किया जाए। वैसे चीता के प्रबंधन में लापरवाही हुई है, इसका पोल भी हटाए गए ड्राइवर ने खोल दी है।

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