कीचड़ से सना रास्ता

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अनोखा तीर, करताना। आजादी के वर्षों बाद कई ग्रामों में आज भी पक्की सड़कें नहीं बन पाई हैं। ऐसे में ग्रामीणों सहित स्कूली विद्यार्थियों अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है। विद्यार्थी घुटने घुटने कीचड़ से सन्ने हुए मार्ग से होकर गुजरते हैं। जानकारी के अनुसार गाड़ामोड़-नयागांव मार्ग पर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी कीचड़ में से होकर से नदी के उपर रखे लोहे के एंगल से होकर गुजरते हैं। अस्थाई पुल के ऊपर से गुजरते समय किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण प्रमोद पटेल, मनीष यदुवंशी, नयागांव सरपंच महेंद्रसिंह यदुवंशी ने बताया कि गाड़ामोड़ में केवल शासकीय स्कूल पांचवीं तक है। इसके बाद पढाई करने के लिए गरीब परिवार के बच्चों को नयागांव में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में रास्ते में कीचड़ होने की वजह से बच्चों को सिर पर बस्ता ओर हाथ में जूते चप्पल लेकर निकलना पड़ रहा है। वहीं दोनों गांव के बीच पड़ने वाली गोमती नदी पार करने के लिए लोहे के एंगल से एक अस्थाई पुल बनाया गया है। जिसके ऊपर से बच्चे निकलते है। ज्यादा बारिश होने पर कच्चे रास्ते पर कीचड़ मच जाती है, तब बच्चें स्कूल नहीं जा पाते हैं।

10 कि.मी का लगाना पड़ता है चक्कर

गाड़ामोड़ से नयागांव का सीधा रास्ता कच्चा होने की वजह से वाहन चालकों को नयागांव जाने के लिए 10 किमी का चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। डेढ़ किमी इस कच्चे रास्ते से होकर रोजाना स्कूली बच्चे निकलते है, जिनकों कीचड़ में से होकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क निर्माण से बच्चों को सुविधा होने के साथ ही ग्रामीणों को भी आवागमन में आसानी होगी।

इनका कहना है..

गाड़ामोड़ से नयागांव डेढ़ किमी सड़क का निर्माण कार्य सुदूर सड़क योजना के तहत स्वीकृत कराकर जल्द कराया जाएगा।

सुनिल दुबे, विधायक प्रतिनिधि जपं टिमरनी

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